शहर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था विद्या प्रचारिणी सभा (भूपाल नोबल्स) में वर्तमान प्रबंधन और चेयरमैन के मध्य प्रशासनिक विवाद गहराया है। चेयरमैन, पूर्व राज परिवार सदस्य एवं नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने वित्तीय अनियमितताओं, ऑडिट में असहयोग और कार्यकाल पूर्ण होने के आरोपों के तहत मौजूदा कार्यकारिणी को दरकिनार कर 11 सदस्यीय एडहॉक कमेटी बनाई है। संस्था की प्रशासनिक बागडोर अब डॉ. युवराज सिंह झाला की अध्यक्षता वाली इस समिति को सौंपी गई है। दूसरी ओर, सभा के मंत्री और प्रबंध निदेशक ने इन नियुक्तियों को अवैध बताते हुए चेयरमैन के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि संस्था के संविधान के अनुसार लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कार्यकारिणी को हटाने की शक्ति केवल सभा के पास सुरक्षित है, प्रधान संरक्षक के पास नहीं। प्रबंधन ने चेयरमैन के निर्णय को चुनौती दी है। दोनों पक्षों में यह टकराव संस्थागत और कानूनी स्तर पर बना हुआ है। चेयरमैन ने लगाई ऑडिट में बाधा व अनियमितताओं के आरोपों की झड़ी कार्यकाल समाप्ति - वर्तमान प्रबंधन का कार्यकाल 12 फरवरी, 2026 को समाप्त हो चुका। उन्हें केवल दैनिक कार्यों के लिए अस्थायी अनुमति दी थी। ऑडिट में असहयोग - कोर्ट आदेश पर शुरू बाह्य समग्र ऑडिट में प्रबंधन बाधा बन रहा है। एक माह में जारी 60 मेमो का जवाब न देना व ऑडिटर के रिकॉर्ड हटाना गंभीर है। प्रतिनिधियों की अनदेखी - चेयरमैन द्वारा नामित डॉ. युवराज सिंह झाला, बलवंत सिंह सीसवी और एडवोकेट नरेंद्र सिंह को प्रक्रिया से बाहर रखकर मनमानी की गई। एडहॉक समिति बनाई - डॉ. युवराज सिंह झाला (चेयरमैन), अचलसिंह राठौड़, देवेंद्र सिंह, प्रेम सिंह, ललित सिंह, नकुल सिंह, चंद्रभान सिंह, रघुवीर सिंह, दलीप सिंह, विजेंद्र सिंह व एडवोकेट नरेंद्र सिंह की समिति को कमान।