ब्यावर के राजकीय अमृतकौर अस्पताल में एक गर्भवती महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने हॉस्पिटल स्टाफ और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जिसके बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार रायपुर क्षेत्र के ग्राम पचानपुरा निवासी रेखा (30) पत्नी कालूसिंह 8 महीने की गर्भवती थीं। परिजनों ने बताया कि रेखा को उच्च रक्तचाप (बीपी) की शिकायत थी। प्रारंभ में उन्हें एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया गया, जिन्होंने तत्काल राजकीय अमृतकौर अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद परिजन रेखा को अस्पताल के एमसीएच विंग में लेकर पहुंचे और उन्हें भर्ती कराया गया। मृतका की मां बोली- समय पर नहीं मिला इलाज मृतका की मां और अन्य परिजनों का आरोप है कि भर्ती के बाद रेखा की तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन उसे समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिला। परिजनों के अनुसार शाम करीब 6 बजे रेखा की हालत गंभीर होने और रक्तचाप अत्यधिक बढ़ने की जानकारी चिकित्सकीय स्टाफ को दी गई थी। बाद में संबंधित डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी और इलाज के दौरान रेखा की मौत हो गई। मामले की गहन जांच की मांग परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर उचित चिकित्सा और निगरानी मिलती तो जच्चा और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन अस्पताल पहुंच गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। शव को मॉर्च्युरी में रखवाने को लेकर भी अस्पताल प्रशासन और परिजनों के बीच विवाद की स्थिति बनी। परिजनों ने अस्पताल में किया प्रदर्शन विवाद उस समय और बढ़ गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके सभी परिजनों के पहुंचने और सूचना देने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पुलिस को बुलाकर शव को मॉर्च्युरी में शिफ्ट करवा दिया। इसे लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। मृतका के पति कालूसिंह के विदेश में होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि रेखा के पहले से 2 जुड़वा बच्चे हैं। घटना के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने शव को मॉर्च्युरी में रखवाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।