16वें श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव में गुरुवार को ब्यावर श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग गया। सिंहासन छोड़ पहियों पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम जब भक्तों के बीच पहुंचे तो शहर जय जगन्नाथ और हरे कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। दोपहर 3.30 बजे प्राचीन गोपालजी मंदिर से भगवान के विग्रहों को नंदी घोष रथ में विराजमान कराया गया। यात्रा शुरू होने से पहले कलेक्टर, एसडीएम सहित जनप्रतिनिधियों और लोगों ने पवित्र झाड़ू लगाकर भगवान के मार्ग को स्वच्छ किया और ओडिशा की प्राचीन "छेरा पौहरा' परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने बासुकी रस्सी के सहारे रथ को खींचते हुए यात्रा का शुभारंभ किया। रथयात्रा के आगे ओडिशा से आई बालिकाओं की टोली ने ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। वहीं इस्कॉन के भक्तों के भजन, प्रभातफेरी परिवार के संकीर्तन और महिला मंडलों के कीर्तन ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया। यात्रा मार्ग पर पुलिस बल और स्वयंसेवक तैनात रहे, जबकि यातायात सुचारू रखने के लिए आवश्यक स्थानों पर रूट डायवर्ट किए गए। भाई बलभद्र बहन सुभद्रा के साथ रथ में सवार जगन्नाथ प्रभु। यात्रा में भजन-कीर्तन करती मंडलियां। रथ के आगे नृत्य करतीं श्रद्धालु। कत्थक नृत्य की प्रस्तुति देती बालिकाएं। रथयात्रा प्रमुख विजय तंवर ने बताया कि सुबह समिति के सदस्यों ने बांकेबिहारी मंदिर के शिखर पर ध्वजा अर्पित की। शाम को रथयात्रा बांकेबिहारी मंदिर पहुंची, जहां महाप्रभु की अगवानी की गई। ट्रस्ट अध्यक्ष माणक डाणी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा अगले 10 दिन मंदिर में विराजमान रहेंगे। प्रतिदिन नए शृंगार, महाप्रसाद, कथा, भजन- कीर्तन और धार्मिक- सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।