बोर्ड ऑफ विजिटर्स कमेटी के अंतर्गत मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हारून और जिला कलेक्टर कमल राम मीणा ने ब्यावर जिला जेल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बंदियों की समस्याएं सुनीं और विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने बंदियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विचाराधीन मामलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता, विधिक सहायता और अन्य मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। यह भी सुनिश्चित किया गया कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया या कानूनी सहायता प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप, अधिकारियों ने बंदियों से पूछा कि क्या उनके साथ जाति, धर्म, समुदाय या सामाजिक आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव तो नहीं किया जा रहा है। बंदियों की सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सुधारात्मक गतिविधियों और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने कारागृह प्रशासन को बंदियों के अधिकारों की रक्षा करते हुए मानवीय गरिमा के अनुरूप सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश सोनल पारीख, अतिरिक्त जिला कलेक्टर ब्रह्मालाल जाट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. अनुकृति उज्जैनिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय सिंह गहलोत और समिति सदस्य रेणु गर्ग उपस्थित रहे। कारागृह प्रशासन की ओर से उपाधीक्षक कोमल पुरोहित, जेलर धारा सिंह और चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल हनुमान सिंह राठौड़ भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जोर दिया कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बंदी के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।