भरतपुर जिले की पथैना ग्राम पंचायत की सरपंच स्नेहलता को अपने पदमुक्ति आदेश पर हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सरपंच को पद से हटाने के आदेश पर स्टे दे दिया है। राज्य सरकार की ओर से 3 जुलाई को अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव त्रिलोक चंद मीणा ने स्नेहलता को सरपंच पद से पदमुक्त करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद सरपंच ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेश को चुनौती दी थी। 23 जून को हुआ था औचक निरीक्षण पब्लिक प्रोसिक्यूटर भगत सिंह निवासी सूरौता ने बताया कि 23 जून को जिला परिषद की टीम ने पथैना ग्राम पंचायत का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम ग्राम पंचायत का रिकॉर्ड जब्त करने पहुंची थी। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड जब्त करने के दौरान ग्रामीणों और सरपंच के पति ने इसका विरोध किया था। दो घंटे बाद रिकॉर्ड जब्त करने पर बनी सहमति करीब दो घंटे तक चले विरोध के बाद रिकॉर्ड जब्त करने पर सहमति बनी। इसके बाद जिला परिषद की टीम ने ग्राम पंचायत का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिया। इसके बाद 3 जुलाई को अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव त्रिलोक चंद मीणा ने आदेश जारी करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत पथैना की सरपंच स्नेहलता ने ग्राम पंचायत के राजकीय कार्यों का संपादन नहीं किया और अपने पद का दुरुपयोग किया है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने स्नेहलता को सरपंच पद से पदमुक्त करने के आदेश जारी किए थे। पदमुक्ति के आदेश के बाद स्नेहलता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आदेश को चुनौती दी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पदमुक्ति आदेश पर स्टे दे दिया है। सरपंच पति ने लगाए आरोप वहीं सरपंच पति ब्रजेश सिंह ने बताया कि 22 जून को जाट आरक्षण को लेकर हुंकार सभा हुई थी। उनका आरोप है कि प्रशासन और सरकार ने इस सभा को असफल बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि सभा सफल होने के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए यह कदम उठाया। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।