राजसमंद जिले के भाटोली गांव में माताजी के ज्वारा विसर्जन का धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। मंदिर से 51 फीट ऊंचे नौखंडीय नेजे के साथ गाजे-बाजे में सरवर यात्रा निकाली गई। इसमें भाटोली सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। बनास नदी के विसर्जन स्थल पर पूजा-अर्चना और परंपरागत रस्म के बाद ज्वारों का विसर्जन किया गया। मंदिर से निकली सरवर यात्रा, जगह-जगह पुष्पवर्षा माताजी के मंदिर से निकली यात्रा में श्रद्धालु सिर पर ज्वारे धारण कर जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। पुजारी बंशीलाल कुमावत का श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। गांव के मुख्य मार्ग से गुजरने के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा बनास नदी स्थित विसर्जन स्थल पर पहुंची। पूजा-अर्चना के बाद बनास नदी में ज्वारों का विसर्जन विसर्जन स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार समय बंचावनी की रस्म निभाई गई। इसके बाद माता के जयकारों के बीच ज्वारों का नदी में विसर्जन किया गया। इस दौरान कई महिला-पुरुषों में भोपा भाव भी हुए। आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालु कार्यक्रम में नाकली, अमलोई, कुमारिया खेड़ा, एमड़ी, नौगामा और भाणा सहित आसपास के गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने माताजी से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।