कमजोर मानसून से पिछोला और फतहसागर का जलस्तर घट गया है। इसे देखते हुए जलदाय विभाग (पीएचईडी) ने आने वाली गर्मियों के जल संकट से निपटने के लिए एडवांस ब्लू प्रिंट (प्लान) तैयार कर लिया है। इसके तहत शहर में 21 साल बाद (वर्ष 2004-05 के बाद) बंद पड़ी 24 बावड़ियों को फिर से शुरू किया जाएगा। इनका सर्वे पूरा हो चुका है। अब नगर निगम के जरिए सफाई, पुराना गंदा पानी निकालने और लैब टेस्ट के बाद इन बावड़ियों का पानी शहरवासियों को बांटा जाएगा। शहर में अभी 30 बावड़ियों से पानी लिया जा रहा है। इनमें गुलाब बाग की 8 बावड़ियों से अभी रोज 2 एमएलडी (20 लाख लीटर) पानी मिल रहा है। फायदा: सरकारी नलों पर कम होगी भीड़, मेन पाइपलाइन पर दबाव घटेगा बंद पड़ी 24 नई बावड़ियों की पहचान कर ली गई है। सफाई के बाद इनका पानी सीधे मेन पाइपलाइन में डालने के बजाय पनघट मॉडल पर सप्लाई होगा। यानी बावड़ी पर छोटी मोटर लगाई जाएगी। पास ही पानी की एक टंकी और नल (टैप) लगाए जाएंगे, जहां से आसपास के लोग सीधे पानी भर सकेंगे। सफाई, शुद्धता की जांच, फिर सप्लाई पीएचईडी ने नगर निगम को पत्र लिखकर बावड़ियों की गंदगी और गाद निकालने को कहा है। सफाई के बाद पुराना पानी बाहर निकालकर नया भूजल आने दिया जाएगा। पानी की शुद्धता और गुणवत्ता की जांच होगी। लैब रिपोर्ट ओके आने पर पानी की आवक के हिसाब से रोज का वाटर-लिफ्टिंग टारगेट तय होगा। लेकिन बड़ा सवाल पानी की आवक पर निर्भरता का है। सफाई और टेस्टिंग से पहले यह तय नहीं है कि इन 24 बावड़ियों से रोज कुल कितने लाख लीटर अतिरिक्त पानी मिलेगा। इसका सटीक गणित पानी के रिसाव व आवक की जांच के बाद ही साफ होगा।