नागौर के प्रसिद्ध संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर (बुटाटी धाम) में 22.74 करोड़ रुपए के दान में घोटाले को लेकर मंदिर समिति सामने आई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट को फर्जी बताया है। उन्होंने एसडीएम और जांच समिति पर राजनीतिक दुर्भावना में एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जांच समिति में पूरा कोरम मौजूद नहीं था और उनका पक्ष सुने बिना रिपोर्ट तैयार कर दी है। दरअसल, 29 जनवरी 2026 को तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने 13 सदस्यीय समिति बनाई थी। पिछले महीने 23 जून को कमेटी ने जांच रिपोर्ट कलेक्टर देवेंद्र कुमार को सौंपी। इसके अनुसार, 2023-24 और 2024-25 में 15.16 करोड़ का गबन सामने आया। वहीं 2025-26 के रिकॉर्ड जांच दल को उपलब्ध नहीं कराने पर प्रतिकूल अनुमान पर 7.58 करोड़ का गबन जोड़ते हुए कुल 22.74 करोड़ रुपए के कथित गबन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में अध्यक्ष समेत 11 वर्तमान और पूर्व सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ निजी संपत्तियां कुर्क करने की सिफारिश की गई। 5 पॉइंट्स में पढ़िए अध्यक्ष का जवाब… 1. सुनवाई का मौका नहीं मिला: अध्यक्ष ने बताया कि 30 अप्रैल को नोटिस मिलने से पहले ही जांच से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए गए थे। इसके बाद उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के कैंसर पीड़ित होने और ऑपरेशन के कारण जवाब देने के लिए समय मांगा गया था। 2. 1100 पन्नों के दस्तावेज सौंपे: उन्होंने दावा किया कि 23 जून को बिल, वाउचर और बैंक खातों की डिटेल सहित करीब 1100 पन्नों का पूरा रिकॉर्ड जांच समिति को सौंप दिया गया था, जिसकी रसीद भी उनके पास है। इसके बावजूद 26 जून को हुई समिति की बैठक में उन्हें शामिल नहीं होने दिया गया और गार्ड ने उन्हें बाहर ही रोक दिया। 3. बैठक में 13 में से सिर्फ 6 सदस्य मौजूद थे: देवेंद्र सिंह ने कहा कि 13 सदस्यीय जांच समिति की बैठक में केवल 6 सदस्य ही मौजूद थे। बड़ी बात यह है कि वित्तीय मामलों की जांच के लिए जरूरी अकाउंट्स एक्सपर्ट भी बैठक में नहीं था। ऐसे में 22 करोड़ की गड़बड़ी का यह आंकड़ा किस आधार पर तैयार किया गया, इसमें एकतरफा कार्रवाई की आशंका है। 4. निर्माण कार्य और एटीएम किराया रिकॉर्ड में दर्ज: भोजनशाला निर्माण के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यह काम पुरानी समिति के समझौते के तहत ही हुआ था, उनके कार्यकाल में केवल अधूरा काम पूरा कराया गया। इसमें भामाशाहों से 46 लाख रुपए का सहयोग मिला था और बाकी राशि नियमों के तहत खर्च की गई। वहीं एसबीआई के एटीएम का किराया भी सीधे बैंक खाते में आता है, जिसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। 5. फर्जी रसीदें नहीं काटी, स्थानीय होटल मालिक विरोधी हुए: उन्होंने फर्जी रसीदों के आरोपों को गलत बताया और कहा कि रसीद बुकों का प्रिंटिंग रिकॉर्ड और एंट्री रजिस्टर पूरी तरह सुरक्षित है। आरोप लगाया कि मंदिर में मुफ्त भोजनशाला शुरू होने से कुछ स्थानीय होटल और गेस्ट हाउस संचालक उनके विरोधी हो गए हैं। भोजनशाला शुरू होने के पहले दिन उन पर हमला भी हुआ था, जिसकी रिपोर्ट सीसीटीवी फुटेज के साथ कुचेरा थाने में दर्ज है। अब पढ़िए- जांच रिपोर्ट के अनुसार कैसे हुआ 22 करोड़ का घोटाला? 2.60 करोड़ के जेवर का रिकॉर्ड नहीं: पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी, 250 ग्राम सोना था। नई समिति ने कार्यभार ग्रहण करते समय 35.5 किलो चांदी, 280 ग्राम सोना बताया। वर्तमान में 2.60 करोड़ मूल्य की संपत्ति है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है। ग्राम विकास में 1.28 करोड़ का खेल: 2024-25 में ग्राम विकास पर 31.37 लाख खर्च दर्शाए गए, न ठेकेदारों का रिकॉर्ड न भौतिक प्रमाण। कंप्यूटर, फर्नीचर के नाम पर 97.48 लाख बिना बिल, वर्क ऑर्डर के खर्च दिखाए। 82.41 लाख के सीसीटीवी का खर्च: सीसीटीवी कैमरों पर 82.41 लाख खर्च किए गए, लेकिन कोई निविदा नहीं मिली। एम जंक्शन सर्विसेज के नाम 58.14 लाख का भुगतान दर्ज। वाउचर रानाबाई ट्रेडर्स के नाम मिले। इसे भी गड़बड़ी माना गया। दान पेटी और खातों में लाखों का अंतर: दान पेटी की आय ऑडिट रिपोर्ट और रोकड़ बही में अलग-अलग दर्ज मिली। 2023-24 और 2024-25 की आय में अंतर। ग्राम सेवा सहकारी बैंक खाते में 3.40 लाख, ग्रामीण बैंक खाते में 1.75 लाख रुपए का अंतर मिला। रसोई में 49.49 लाख का फर्जी खर्च: भोजनशाला निर्माण पर 49.49 लाख खर्च दिखाए, जबकि ग्राउंड फ्लोर का पूरा निर्माण एक भामाशाह ने कराया था। समिति ने फर्जी बिल लगा मंदिर निधि से राशि निकाल ली। रसोई खर्च 1 साल में 335 प्रतिशत बढ़ गए। गौशाला में भी अनियमितता: सुलभ कॉम्प्लेक्स से प्राप्त 18.12 लाख का किराया मुख्य लेखा पुस्तकों में दर्ज नहीं। गौशाला रखरखाव के नाम पर 17.87 लाख खर्च दिखाए, जबकि समिति ने राशि मिलने से इनकार किया। सुरक्षा व्यवस्था में 31.33 लाख रुपए खर्च दर्शाए गए। कलेक्टर बोले- हम कार्रवाई नहीं कर सकते जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि पूरा मामला कोर्ट में है, इसके कारण पूरे मामले की जांच की जा रही है। जो भी रिपोर्ट आई है, वो भी सर्व समिति की ओर से आई है। रिपोर्ट में वाउचर नहीं है, बिल नहीं है, ऐसे में जांच रिपोर्ट पेश की है। फिलहाल कमेटी जांच कर सकती है, लेकिन वो किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर सकती। उन्होंने कहा- आज मंदिर समिति ने मुलाकात की है, उनकी ओर से की गई मांग पर उच्च अधिकारियों और उच्च कमेटी से जांच करवाई जाएगी। हालांकि जांच कमेटी की बैठक में सभी जरूरी सदस्य मौजूद थे। ऐसे में बैठक तय प्रक्रिया के तहत ही हुई थी। …….. बुटाटी धाम विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में भी मंदिर दान घोटाला, 22 करोड़ का गबन:चढ़ावा, सोने-चांदी का भी रिकॉर्ड नहीं, भामाशाहों ने जो बनवाया, उसे समिति खर्च में जोड़ा राजस्थान में भी अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी जैसा मामला सामने आया है। मामला नागौर के बुटाटी स्थित करीब 500 साल पुराने संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर से जुड़ा है। पूरी खबर पढ़िए