भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन के मामले में सादुलशहर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हुए वित्तीय घपलों और फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट (एफआर) खारिज कर दी है। कोर्ट ने जिला साक्षरता अधिकारी हरविन्द्र सिंह सहित शिक्षा विभाग के चार कार्मिकों के विरुद्ध धोखाधड़ी और गबन की विभिन्न धाराओं में संज्ञान लेते हुए उन्हें जमानती वारंट के जरिए तलब किया है। इन पर स्कूल के पेड़ों को अवैध रूप से बेचने, फर्जी रसीदें काटकर धन वसूलने, सरकारी योजनाओं की राशि हड़पने जैसे गंभीर आरोप हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई तय की गई है। सादुलशहर के 9 एसडीएस निवासी व ​परिवादी सुखदीप सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2024-25 में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लूतपुरा (9 एसडीएस), सादुलशहर की स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) का अध्यक्ष बना। उक्त कमेटी में 16 सदस्य गठित हुए। प्रधानाचार्य सहित अन्य पर आपसी मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप है। इस पर जून 2025 में न्यायालय के जरिए सादुलशहर थाने में परिवाद दर्ज करवाया गया था। सुखदीप सिंह का आरोप है कि भ्रष्टाचार पर आवाज उठाने पर 2 सितंबर 2024 को मनमर्जी से पद से हटाने का प्रस्ताव लेवल-1 अध्यापक सुरेश यादव ने रखा। ग्रामीणों के विरोध पर सुरेश ने दबाव बनाने के लिए गांव के 8 युवाओं पर मुकदमा दर्ज करवा दिया। ​सुखदीप के अनुसार इससे पहले पुलिस ने मामले को रंजिशवश दर्ज बताकर एफआर पेश कर दी थी। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने अहम गवाहों और दस्तावेजों की अनदेखी की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोपियों की ओर से पद का दुरुपयोग कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और गबन करने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। वित्तीय अनियमितता: जनसहयोग से प्राप्त 1,41,550 रुपए की राशि बैंक में जमा न कराकर खुर्द-बुर्द करना। ​ फर्जी रसीदें और अवैध बिक्री: स्कूल के पेड़ों को बिना अनुमति काटकर बेचना। नहर के पानी की बारी बेचने के लिए फर्जी रसीदें छपवाकर ग्रामीणों से पैसे वसूलना। ​योजनाओं में गबन: मिड-डे मील (पोषाहार), छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण, ‘नव भारत साक्षरता परीक्षा' जैसी योजनाओं में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को नुकसान पहुंचाना। ​ साक्षरता अभियान में फर्जीवाड़ा: साक्षरता परीक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति करना। कम उम्र की बालिकाओं को वृद्धों के स्थान पर बिठाकर फर्जी परिणाम तैयार करना। इन अधिकारियों व कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप: { ​हरविन्द्र सिंह: तत्कालीन प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, 8 एसडीएस, सादुलशहर (वर्तमान में जिला साक्षरता अधिकारी, श्रीगंगानगर)। { ​ईश्वर लाल: तत्कालीन कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, 9 एसडीएस, लूतपुरा। वर्तमान में एपीओ, बीकानेर। { सुरेश यादव: अध्यापक, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, 9 एसडीएस। ​ { हरजिन्दर सिंह: व्याख्याता, 8 एसडीएस, सादुलशहर।