पश्चिमी राजस्थान की पावन धरा अपनी रेत, संस्कृति और प्रकृति के लिए जानी जाती है, लेकिन वर्तमान में यह अनमोल विरासत 'कांच के कचरे' से गंभीर संकट में है। जैसलमेर राजपरिवार के सदस्य और पूर्व महारावल चैतन्यराजसिंह ने सार्वजनिक स्थानों, खेल मैदानों और खेतों में फैली शराब व बियर की टूटी बोतलों पर चिंता व्यक्त की है। एक निर्णायक जन-जागरूकता अभियान शुरू करने की अपील की है। जनप्रतिनिधियों से की अपील अभियान को गति देने के लिए चैतन्यराजसिंह ने क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों से जमीनी स्तर पर जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज, जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी, पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव और आजाद सिंह राठौड़ से अनुरोध किया कि वे वीडियो संदेश और सोशल मीडिया कैंपेन के माध्यम से जनता को जागरूक करें। उन्होंने 'नॉमिनेशन चैलेंज' की भी सलाह दी, जिसमें प्रत्येक नेता कम से कम 5 अन्य साथियों को इस अभियान में शामिल करने के लिए आमंत्रित करे। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही पवित्र धरा को सुरक्षित, स्वच्छ और सुंदर बनाए रखा जा सकता है। मिट्टी और मवेशियों के लिए 'धीमा जहर' चैतन्यराजसिंह ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों पर कांच फोड़ना केवल गंदगी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। कांच नॉन-बायोडिग्रेडेबल है और सैकड़ों वर्षों तक मिट्टी में नष्ट नहीं होता। इसके बारीक टुकड़े मिट्टी की उर्वरता को नष्ट करते हैं और पशु-पक्षियों के लिए गंभीर चोटों का कारण बनते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित होती हैं। समधान के लिए पूर्व महारावल ने दिए सुझाव सरकारी स्तर पर: सरकार को कांच की बोतलों के विकल्प के रूप में इको-फ्रेंडली विकल्प जैसे रीसायक्लेबल प्लास्टिक या कैन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके साथ ही 'डिपॉजिट रिटर्न स्कीम' (DRS) लागू करनी चाहिए, ताकि खाली बोतलें वापस कचरा प्रबंधन तंत्र में आ सकें। व्यक्तिगत स्तर पर: आम नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सार्वजनिक स्थानों पर कांच का उपयोग सीमित करना चाहिए और स्वच्छता का संकल्प लेना चाहिए। चैतन्यराजसिंह का मानना है कि यदि सरकार और नागरिक मिलकर कदम उठाएं, तो राजस्थान की पावन धरा को 'कांच के कचरे' से मुक्त रखा जा सकता है।