चारधाम यात्रा के चौथे दिन बुधवार सुबह 8 बजे केदारनाथ धाम के कपाट विधिवत खोल दिए गए हैं। परंपरा के अनुसार सबसे पहले मंदिर के पूर्व द्वार को खोला गया और मुख्य पुजारी, रावल व हक-हकूकधारियों ने अंदर प्रवेश कर पूजा-अर्चना शुरू की। इस दौरान पिछले साल कपाट बंद करते समय ज्योतिर्लिंग पर लगाई गई भस्म को हटाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांटा गया। कपाट खुलने के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम में पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की पहली पूजा कराई। वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंदिर के मुख्य द्वार अब आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए और दर्शन शुरू हो गए हैं। वहीं, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने नियमों की अनदेखी करने पर फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से संचालित होने वाली सभी हेली सेवाओं पर दोपहर तक रोक लगा दी थी। जांच के बाद रोक हटा दी गई थी। शंकराचार्य की गद्दी, उद्धव और कुबेर की उत्सव डोलियां चमोली जिले के पांडुकेश्वर से 20 किलोमीटर की यात्रा कर बद्रीनाथ धाम पहुंच चुकी हैं। अब कल सुबह 6 बजे बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे। केदारनाथ धाम की PHOTOS देखिए… आज बाबा को नहीं लगेगा भोग आज पहले दिन केदारनाथ भगवान को भोग नहीं लगाया जाएगा। परंपरा के अनुसार भोग की शुरुआत तभी होती है जब भैरवनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं। इस बार भैरव मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को खुलेंगे, जिसके बाद बाबा केदारनाथ को पीले चावलों का भोग लगाया जाएगा और नियमित भोग शुरू होगा। मान्यता के अनुसार भुकुंड भैरव मंदिर को केदारनाथ धाम का क्षेत्र रक्षक माना जाता है। यह मंदिर केदारनाथ से करीब 500 मीटर दक्षिण में स्थित है और माना जाता है कि बाबा केदार के दर्शन से पहले भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी होता है, तभी यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इस बार यात्रा में नियमों को लेकर ज्यादा सख्ती देखने को मिल रही है। मंदिर समिति ने साफ किया है कि मंदिर परिसर से 50 से 60 मीटर के एरिया में किसी भी व्यक्ति को मोबाइल फोन ले जाने की परमिशन नहीं है। इसके अलावा फोटोग्राफी के लिए धाम में अलग से तय स्थान बनाए गए हैं, मोबाइल वहीं इस्तेमाल किया जा सकेगा। मुख्य मंदिर परिसर में रील बनाना, फोटो खींचना और वीडियो बनाना पूरी तरह बैन है। 149 दिन बाद बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे जोशीमठ स्थित नरसिंह मंदिर में मंगलवार, 21 अप्रैल को पंच पूजा के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और विष्णु वाहन भगवान गरुड़ जी की डोली ने भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम के लिए प्रस्थान किया।डोली यात्रा के मार्ग के तहत मंगलवार शाम को ये डोलियां पहले पांडुकेश्वर पहुंचीं, जहां भगवान कुबेर और उद्धव जी की शीतकालीन पूजा स्थली स्थित है। यहां जोशीमठ से आई डोलियों का कुबेर व उद्धव जी की डोलियों के साथ मिलन हुआ। पांडुकेश्वर में रात्रि प्रवास के बाद, आज (बुधवार) विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान शंकराचार्य की गद्दी, भगवान गरुड़, कुबेर जी और उद्धव जी की ये संयुक्त देव डोलियां बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुईं। ये सभी डोलियां बद्रीनाथ धाम पहुंच चुकी हैं। इसके बाद अब 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इससे पहले बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को दोपहर 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। 16 क्विंटल फूलों से सजाया जा रहा बद्रीनाथ धाम बद्रीनाथ धाम को 16 क्विंटल गेंदे के फूलों से भव्य रूप में सजाया जा रहा है। सजावट को खास बनाने के लिए कोलकाता से विशेष गुलाब के फूल मंगाए गए हैं। साथ ही, भगवान बद्री विशाल की विशेष पूजा-अर्चना के लिए तुलसी भी बंगाल से ही मंगाई गई है। दैनिक भास्कर चारधाम यात्रा गाइड, केदारनाथ-बद्रीनाथ जाने का प्लान कर रहे हैं तो ये गाइड आपके सबसे काम की है, इसे बिना पढ़े न जाएं धाम से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…