6 साल से फरार 25 हजार रुपए का इनामी अफीम तस्कर आखिरकार चित्तौड़गढ़ में पकड़ा गया। मध्यप्रदेश का रहने वाला गोमाराम उर्फ गोविंद उर्फ गोमा(72) रिश्तेदार के मौसर (मृत्युभोज) में शामिल होने गंगरार आया था। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) उसकी हर गतिविधि पर पहले से नजर रखे हुए थी। टीम ने प्रोग्राम खत्म होने तक इंतजार किया और जब वह स्कॉर्पियो से वापस लौटने लगा तो बस्सी के पास घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गोमाराम पिछले कई सालों से राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच अफीम तस्करी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था और हर महीने लाखों रुपए की कमाई कर रहा था। ऑपरेशन 'खंगार' में मिली बड़ी सफलता आईजी विकास कुमार ने बताया कि बालोतरा पुलिस की ओर से गोमाराम पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था। वह साल 2020 से एक अफीम तस्करी के मामले में फरार चल रहा था और लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस से बच रहा था। एएनटीएफ ने उसे पकड़ने के लिए 'ऑपरेशन खंगार' शुरू किया था। लंबे समय तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद टीम को सूचना मिली कि वह चित्तौड़गढ़ जिले में अपने रिश्तेदार के यहां मौसर में शामिल होने आने वाला है। इसके बाद पुलिस ने पूरी योजना बनाकर कार्रवाई की और बस्सी के पास उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि वह राजस्थान में सक्रिय बड़े अफीम सप्लायरों में शामिल था और कई तस्करों को माल पहुंचाता था। खेती और भैंसों के कारोबार से तस्करी तक का सफर पुलिस जांच में सामने आया कि गोमाराम मूल रूप से मध्यप्रदेश के नीमच जिले का रहने वाला है और पढ़ा-लिखा नहीं है। पहले वह खेती करता था और भैंसों की खरीद-फरोख्त का काम भी करता था। गांव के जंगलों में भैंस चराने का काम भी करता था, लेकिन इससे परिवार का खर्च ठीक से नहीं चल पा रहा था। इसी दौरान उसके एक परिचित ने उसे अफीम तस्करी में उतरने की सलाह दी। शुरुआत में उसने दूसरे तस्करों के साथ मिलकर काम किया, लेकिन धीरे-धीरे उसने खुद का नेटवर्क तैयार कर लिया। इसके बाद उसने राजस्थान के कई तस्करों से संपर्क बनाए और अफीम की सप्लाई शुरू कर दी। देखते ही देखते वह राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच अवैध अफीम सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन गया। हर महीने लाखों की कमाई, तस्करी ही बना कमाई का जरिया पुलिस के अनुसार गोमाराम आसपास के किसानों से चोरी-छिपे करीब एक लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से अफीम खरीदता था। इसके बाद वही अफीम राजस्थान, खासकर मारवाड़ क्षेत्र के तस्करों को करीब 1.40 लाख रुपए प्रति किलो में बेच देता था। यानी हर किलो पर उसे करीब 40 हजार रुपए का फायदा होता था। पुलिस का दावा है कि उसके पास हर महीने पांच से छह बार तस्कर आते थे और हर बार चार से पांच किलो अफीम लेकर जाते थे। इस तरह वह महीने में करीब 25 से 30 किलो अफीम की सप्लाई करता था और लगभग 10 से 12 लाख रुपए तक कमा लेता था। पुलिस का कहना है कि तस्करी से हुई कमाई से उसने अच्छा पैसा बनाया और महंगी गाड़ियों में घूमने का भी शौक पूरा करता रहा। पहले भी कई मामलों में आया नाम, लेकिन हर बार बच निकला गोमाराम का नाम पहली बार साल 2019 में तब सामने आया, जब वह भैंसों का व्यापार करने के बहाने सिरोही गया था। पुलिस के अनुसार उस दौरान वह साथ में अफीम की सप्लाई भी करता था। सिरोही पुलिस ने उसके एक साथी तस्कर को गिरफ्तार किया तो पूछताछ में गोमाराम का नाम सामने आया। बाद में उसे जेल भी जाना पड़ा। इसके बाद साल 2020 में फिर उसका नाम एक बड़े मामले में सामने आया। मारवाड़ का एक तस्कर उससे दो किलो अफीम लेकर जा रहा था, जिसे बाड़मेर जिले के सिवाणा थाना पुलिस ने पकड़ लिया। पूछताछ में गोमाराम का नाम सामने आने पर उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ, लेकिन तब तक वह फरार हो चुका था। पुलिस कई बार उसके गांव पहुंची, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। फरारी में भी नहीं छोड़ा धंधा, आखिर मौसर में आकर फंस गया पुलिस के मुताबिक फरार रहने के दौरान भी गोमाराम ने तस्करी का धंधा नहीं छोड़ा। वह भैंसों की खरीद-फरोख्त के बहाने जालोर, बाड़मेर और दूसरे इलाकों में जाता था और इसी दौरान अफीम की सप्लाई भी करता था। पुलिस लंबे समय से उसके घर, रिश्तेदारों और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखे हुए थी। जांच के दौरान टीम को पता चला कि उसके एक रिश्तेदार के यहां गंगरार क्षेत्र में मौसर का प्रोग्राम है और गोमाराम वहां जरूर आएगा। टीम पहले से मौके पर पहुंच गई और कार्यक्रम के दौरान उसे पकड़ने के बजाय बाहर निकलने का इंतजार करती रही, ताकि किसी तरह का हंगामा न हो। जैसे ही वह परिवार के साथ स्कॉर्पियो में बैठकर रवाना हुआ, बस्सी के पास पहले से घात लगाए बैठी एएनटीएफ टीम ने गाड़ी रुकवाया और बिना किसी मौके के उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि अब उससे पूछताछ कर उसके पूरे नेटवर्क, संपर्कों और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।