चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर अब पुलिस ने ड्रोन पेट्रोलिंग शुरू की है, ताकि सुनसान इलाकों में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। इस नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ अपराध रोकना नहीं, बल्कि दुर्ग घूमने आने वाले हजारों पर्यटकों को सुरक्षित माहौल देना भी है। पुलिस का कहना है कि परिवार, महिलाएं और बच्चे बिना किसी परेशानी के पूरे किले में घूम सकें। इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन की मदद से उन जगहों तक भी निगरानी पहुंच रही है, जहां सामान्य पुलिस गश्त हर समय संभव नहीं हो पाती। अभियान की शुरुआत के साथ ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध एमपी नंबर की कार को जब्त किया और इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। 72 मिनट तक हुई निगरानी, कई इलाकों पर रखी नजर कोतवाली थाना क्षेत्र में पुलिस की ड्रोन टीम ने दो अलग-अलग उड़ानें भरकर कुल 72 मिनट तक निगरानी की। इस दौरान चित्तौड़गढ़ दुर्ग के अलग-अलग हिस्सों के साथ शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर भी नजर रखी गई। सुनसान जगहों पर शराब और नॉनवेज पार्टियों की मिलती रही शिकायत चित्तौड़गढ़ दुर्ग के कई हिस्से ऐसे हैं जहां लोगों की आवाजाही कम रहती है। इन्हीं सुनसान स्थानों का फायदा उठाकर कुछ लोग शराब पार्टी करते हैं और नॉनवेज बनाते हैं। दुर्ग क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने कई बार पुलिस और प्रशासन से इसकी शिकायत भी की थी। खास बात यह है कि कुछ धार्मिक और पवित्र स्थलों के आसपास भी इस तरह की गतिविधियों की सूचना समय-समय पर मिलती रही है। पुलिस का मानना है कि लगातार ड्रोन निगरानी से ऐसे लोगों में डर बनेगा और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगेगी। आगे भी लगातार चलेगा अभियान एसपी धर्मेंद्र यादव का कहना है कि यह सिर्फ एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि आगे भी ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी जारी रहेगी। नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था मजबूत रखना, अपराधों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करना इसका मुख्य उद्देश्य है।