चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति की पुरोहितों का सांवता ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव से पहले ही एक गांव ने अपना संयुक्त उम्मीदवार तय कर लिया है। पुरोहितों का सांवता गांव के लोगों ने आपसी सहमति बनाने के लिए प्री-वोटिंग कराई। इसमें चार संभावित दावेदारों में सत्यनारायण बड़वा को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें अपने गांव का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया। हालांकि, यह फैसला पूरी ग्राम पंचायत के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ पुरोहितों का सांवता गांव के स्तर पर लिया गया है। ग्राम पंचायत के दूसरे गांवों से भी उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे। ऐसे में अब सरपंच पद का मुकाबला अलग-अलग गांवों के उम्मीदवारों और उनके समर्थन के आधार पर होगा। 1104 मतदाताओं में से 944 ने की प्री-वोटिंग पुरोहितों का सांवता गांव में हुई प्री-वोटिंग में चार संभावित दावेदार शामिल हुए। इनमें कैलाश चंद अहीर, गोपीलाल अहीर, शंकर अहीर और सत्यनारायण बड़वा थे। गांव के कुल 1104 मतदाताओं में से 944 लोगों ने मतदान किया। इस दौरान 12 मत निरस्त हुए। मतगणना के बाद सत्यनारायण बड़वा को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें गांव का संयुक्त उम्मीदवार मानने पर सहमति जताई। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव लड़ना सभी का अधिकार है। अगर कोई अन्य व्यक्ति भी नामांकन भरना चाहे तो उस पर कोई रोक नहीं है, लेकिन गांव की सामूहिक सहमति सत्यनारायण बड़वा के साथ है। ग्रामीणों के मुताबिक, एक ही गांव से कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरने पर वोट बंट जाते हैं और इसका नुकसान पूरे गांव को उठाना पड़ सकता है। इसी वजह से इस बार चुनाव से पहले ही गांव के लोगों की राय लेकर एक उम्मीदवार तय किया गया। मांदलदा से बद्रीलाल गुर्जर और गोपालपुरा से रतन अहीर भी मैदान में पुरोहितों का सांवता ग्राम पंचायत में संयुक्त उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया सिर्फ सांवता गांव तक सीमित रही है। जानकारी के अनुसार, मांदलदा से बद्रीलाल गुर्जर और गोपालपुरा से रतन अहीर भी सरपंच पद के लिए चुनाव मैदान में उतरेंगे। ऐसे में फिलहाल ग्राम पंचायत में तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की तस्वीर बन रही है। इस चुनाव में उम्मीदवारों के साथ-साथ अलग-अलग गांवों का समर्थन और चुनावी समीकरण भी अहम रहेंगे। पुरोहितों का सांवता गांव ने प्री-वोटिंग के जरिए पहले ही अपनी रणनीति साफ कर दी है। अब देखना होगा कि मतदान के दिन गांव की यह एकजुटता कितनी कायम रहती है और दूसरे गांवों के मतदाता अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में किस तरह मतदान करते हैं। नामांकन और चुनाव प्रचार के साथ पुरोहितों का सांवता ग्राम पंचायत में सरपंच पद का मुकाबला और स्पष्ट होगा। यहां चुनाव में उम्मीदवारों के साथ गांवों के समर्थन और एकजुटता की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।