जैसलमेर में गोडावण के लिए टनल बनकर तैयार हो गई है। पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा में बनाए गए रिवाइल्डिंग ढांचे (टनल) में ब्रीडिंग सेंटर से करीब एक महीने की उम्र के 3 नन्हे गोडावण के बच्चों को शिफ्ट (ट्रांसलोकेट) किया गया है। टनल में शिफ्ट हुए गोडावण के बच्चे अब अकेले जीना सीखेंगे। उन पर इंसानी दखल नहीं रहेगा। इस टनल में गोडावण के बच्चों को जंगल जैसा माहौल मिलेगा। ताकि वे प्राकृतिक माहौल में खुद को ढाल सकें। अब तक ब्रीडिंग सेंटर में ही इनकी मेटिंग और AI के जरिए कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता था। हालांकि एक्सपर्ट सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे उन पर नजर रखेंगे और उनकी समय-समय पर देखभाल करेंगे। ताकि वह मरुस्थल के कठिन मौसम, गर्मी और प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल पूरी तरह ढल सकें।
राजस्थान के राज्य पक्षी और विलुप्त होने की कगार पर 'गोडावण' (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को बचाने और उनकी आबादी को वापस जंगलों में बढ़ाने की दिशा में राजस्थान वन विभाग की पहल है। इसलिए खास है अत्याधुनिक रिवाइल्डिंग ढांचे (टनल) सम और रामदेवरा स्थित गोडावण कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटरों में जन्म लेने वाले गोडावण के बच्चों को इंसानी देखरेख की आदत हो जाती है। ऐसे में यदि इन्हें सीधे खुले जंगल में छोड़ दिया जाए, तो इनके जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। इसी समस्या के समाधान के लिए इस रिवाइल्डिंग टनल का निर्माण किया गया है। यहां टनल के अंदर मरुस्थलीय क्षेत्र की स्थानीय वनस्पति, झाड़ियां और प्राकृतिक पेड़-पौधे मौजूद हैं। जिससे गोड़ावन के बच्चे को अपने असली घर जैसा माहौल मिलता है। इस नियंत्रित वातावरण में गोडावण के बच्चों को प्राकृतिक कीट-पतंगे, टिड्डे और छोटे जीव खाने का अभ्यास कराया जाता है। जिससे वे खुद भोजन तलाशना सीखेंगे। इसके साथ ही गोडावण के बच्चे टनल के अंदर रहकर मरुस्थल की भीषण धूप, हवाओं और तापमान के बदलाव को सहन करने की क्षमता विकसित करते हैं। 4 महीने बाद डेजर्ट नेशनल पार्क में होंगे शिफ्ट जैसलमेर के उप वन संरक्षक (वन्यजीव) अशोक सिंह ने बताया- इस समय टनल में मौजूद गोडावण के तीनों बच्चों की सेहत, खान-पान, शारीरिक विकास और व्यवहार में आ रहे बदलावों पर विशेषज्ञों की टीम लगातार नजर रख रही है। इनके स्वास्थ्य से जुड़ी हर बारीक जानकारी दर्ज की जा रही है। लगभग चार महीने का समय पूरा होने के बाद, जब ये चूजे प्राकृतिक माहौल में खुद से जीवित रहने, खतरा भांपने और भोजन तलाशने में पूरी तरह सक्षम हो जाएंगे, तब इन्हें चरणबद्ध तरीके से 'डेजर्ट नेशनल पार्क' (DNP) के विस्तृत और खुले प्राकृतिक इलाके में मुक्त कर दिया जाएगा। भारत में बेहद संकटग्रस्त गोडावण पक्षी की संख्या बढ़ाने और इन्हें जंगलों में फिर से पूरी तरह स्थापित करने के इस राष्ट्रीय अभियान में यह कदम बेहद अहम और ऐतिहासिक साबित होगा। ….. ये खबर भी पढ़े… राजस्थान में 9 करोड़ की टनल बचाएगी 'गोडावण':64 मीटर लंबी सुरंग में चूजों को मिलेगी शिकार करने की ट्रेनिंग
राज्य पक्षी गोडावण को विलुप्त होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार और वन विभाग ने एक मास्टरप्लान तैयार किया है। जैसलमेर के रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर में 9.25 करोड़ रुपए की लागत से एक विशेष टनल बनाई गई है। पढ़े पूरी खबर… ………… जैसलमेर में आर्टिफिशियल तरीके से गोडावण का जन्म:ब्रीडिंग सेंटर में 94 हुई संख्या; 9 करोड़ से टनल बन रही राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण की संख्या बढ़कर 94 हो गई है। जैसलमेर में ब्रीडिंग सेंटर पर करीब एक महीने पहले तीन गोडावण का जन्म हुआ था। दो गोडावण का जन्म कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) के बाद अंडे से हुआ था। एक का जन्म जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडे से हुआ था। पढ़े पूरी खबर…