बूंदी की पहचान सिर्फ महलों और बावड़ियों से नहीं, बल्कि उस साहित्य से भी है, जिसने राजस्थान की वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रबोध को शब्द दिए। इसी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से मंगलवार को महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण जन्मोत्सव सप्ताह के तहत विरासत यात्रा निकाली गई। रानीजी की बावड़ी कविराजा की प्रतिमा पर माल्यार्पण से शुरू हुआ। कार्यक्रम उनकी हवेली और भवाल्दी बावड़ी तक पहुंचा। यात्रा में शामिल लोगों ने शहर की ऐतिहासिक बसावट को करीब से देखा और विरासत सहेजने का संकल्प लिया। समारोह में साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाले नंदू राजस्थानी, पीयूष पाचक, सुमित विजय, प्रकाश परचम, नंदलाल राव, रामस्वरूप मूंदड़ा और डॉ. सतीश शर्मा को सूर्यमल्ल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विरासत यात्रा में बार एसोसिएशन अध्यक्ष नारायणसिंह गौड़ झुवासा, विनोद शृंगी, शुभम शृंगी, सुरेश शर्मा, एजाजुद्दीन अंसारी, बलवंत भड़कता, अशफाक गौरी शामिल हुए। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को कविराजा की हवेली और भवाल्दी बावड़ी की ऐतिहासिक पहचान से परिचित कराया गया। समापन समारोह में शहर की विरासत को सहेजने का संकल्प लिया गया। विरासत बचाने के साथ विकास की जरूरत भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) चैप्टर बूंदी की ओर से कार्यक्रम हुआ, जिसमें सभापति भरत शर्मा ने कहा कि सूर्यमल्ल मिश्रण राजस्थान की शान हैं। उनके पदचिह्नों पर चलकर बूंदी की विरासत बचाने और विकास के जरिए बदलाव लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। चैप्टर संयोजक राजकुमार दाधीच ने कहा कि जन्मोत्सव सप्ताह का उद्देश्य महाकवि के विचारों और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने मिश्रण के साहित्य को राष्ट्रवाद की भावना विकसित करने के लिए पाठ्यक्रमों में शामिल करने की जरूरत बताई। महाकवि के परिजन खुमानसिंह और सह संयोजक राजेंद्र भारद्वाज ने भी विचार रखे।