एजीटीएफ द्वारा झोटवाड़ा से सुजानगढ़ शूटआउट के मुख्य आरोपी कृष्ण सिंह की गिरफ्तारी के बाद, जिन लोगों को गैंगस्टर से धमकियां मिली थीं, उन मामलों में अब गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कृष्ण सिंह कुख्यात गैंगस्टरों के संपर्क में था। इससे यह संभावना बढ़ गई है कि वह उनके इशारे पर व्यापारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों को डराने-धमकाने का काम कर रहा था। पुलिस की टीमें उसके मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किन-किन लोगों को धमकाने में शामिल रहा है। पुलिस कृष्ण सिंह की गिरफ्तारी को गैंगस्टरों के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही है। इस कार्रवाई से शहर में बढ़ते अपराध और रंगदारी के मामलों के खुलासे की संभावना जताई जा रही है। शहर में 10 लाख किराएदार, वेरिफिकेशन सिर्फ 10-15 प्रतिशत का ही शहर में करीब 10 लाख किराएदार रहते हैं, जिनमें से केवल 10 से 15 प्रतिशत का ही पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है। ऐसे में मकान मालिकों को अलर्ट किया गया है कि बिना वेरिफिकेशन किरायेदार रखने पर, यदि वह अपराधी निकलता है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसे अपराधी को छिपने के लिए जगह उपलब्ध कराना माना जाएगा। शूटर कृष्ण सिंह की जयपुर में रिश्तेदार ने की मदद अब कार्रवाई उन मददगारों पर केंद्रित है, जिन्होंने उसे दो साल तक राजधानी में छिपाए रखा। इस संबंध में एडीजी दिनेश एमएन ने टीम को सख्त निर्देश दिए हैं। अब तक की जांच में सामने आया है कि अपराधी कृष्ण सिंह को जयपुर में पैर जमाने के लिए उसके रिश्तेदार पवन सिंह ने न केवल किराए का मकान दिलवाया, बल्कि उसे टैक्सी ड्राइवर की फर्जी पहचान भी दिलाई, जिससे वह पुलिस की नजरों से बचा रहा। बीएनएस की धारा 249 के तहत दर्ज होगा केस एजीटीएफ उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है, जिन्होंने कृष्ण सिंह और लक्ष्मण सिंह को शरण दी। रिश्तेदार पवन सिंह ने कनकपुरा के कीर्ति नगर में गिरवर सिंह (निवासी नागौर, हाल श्रीश्याम एनक्लेव, कालवाड़ रोड) के मकान को किराए पर दिलवाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि मकान मालिक गिरवर सिंह ने किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन कराया था या नहीं। मकान मालिक और मददगार रिश्तेदार के खिलाफ बीएनएस की धारा 249 के तहत केस दर्ज होगा।