प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी की नई किताबों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। विषयवार एक्सपर्ट कमेटियों का गठन नहीं होने से नई किताबों का प्रकाशन अटका हुआ है। कमेटियों की मंजूरी के बाद ही पुस्तकों की विषयवस्तु को हरी झंडी मिलेगी और वे प्रकाशन के लिए जा सकेंगी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। अकादमी की अपेक्षाकृत कम कीमत वाली किताबें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। एक्सपर्ट कमेटियों के गठन के लिए अकादमी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से विषय विशेषज्ञों के नाम मांगे थे। कई बार रिमाइंडर भेजने के बाद नाम मिलने शुरू हुए, लेकिन अब इन्हें सरकारी स्तर पर अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। ऐसे में यदि जल्द कमेटियां गठित नहीं हुईं तो नई किताबों का प्रकाशन और खिसक सकता है तथा नए साल में भी पेंडेंसी बढ़ सकती है। नई किताबें अटकीं तो पुराने लंबित संस्करण छाप रही अकादमी नई किताबों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने के कारण अकादमी फिलहाल पहले से लंबित पुस्तकों और संस्करणों का प्रकाशन करवा रही है। इससे पुरानी पेंडेंसी तो कुछ कम हो रही है, लेकिन नई पुस्तकों का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। ऐसे में सवाल है कि एक्सपर्ट कमेटियों के गठन और उनकी समीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा। सिविल सेवा से शिक्षक भर्ती तक रहती है किताबों की मांग राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी की किताबों की मांग सिविल सेवा सहित शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच रहती है। विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी भी इनका उपयोग करते हैं। नई किताबें उपलब्ध नहीं होने से ऐसे विद्यार्थियों को दूसरे प्रकाशकों की अपेक्षाकृत महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एक्सपर्ट कमेटियों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। गठन पूरा होते ही लंबित पुस्तकों की समीक्षा कर उन्हें प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।