दीवाली का समय है, घरों की सफाई जोरों पर है और कबाड़ीखाने आबाद हैं। इसका सीधा असर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा पर पड़ रहा है। एयरपोर्ट की बाउंड्रीवॉल के नजदीक ही कबाड़घर तक बन गए हैं। छोटे-बड़े मैरिज गार्डन भी चल रहे हैं, जहां खुले में कचरा और खाने का वेस्ट फेंका जा रहा है। ऐसे में बर्ड हिटिंग का खतरा भी है। भास्कर ने एयरपोर्ट की बाउंड्रीवाल की तहकीकात की। इसमें नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई। सामने आया कि टोंक रोड सांगानेर थाने से जगतपुरा की ओर सात नंबर चौराहे की ओर बनी दीवार के सहारे कई जगह कचरे की समय पर सफाई नहीं हो पाती। सात नंबर चौराहे के कुछ ही दूरी पर एयरपोर्ट दीवार से सौ मीटर दूरी पर ही मेरिज गार्डन है। यहां का वेस्ट अक्सर एयरपोर्ट दीवार के पास ही फेंक दिया जाता है। कबाड़घर भी इसी के पास बमुश्किल डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर है। 5 किमी दायरे में खुले कचरे पर रोक, फिर भी दिन-रात जमा हो रहा कबाड़ ऐसे ही कबाड़ दीवार से कुछ ही दूरी पर दिन-रात एकत्र किए जा रहे हैं। टीम जब मौके पर पहुंची तो दीवार के एक तरफ ऊंची दीवार और कंटीले तार दिखे। दूसरी तरफ कचरे के ढेर, टेंट की कुर्सियां, तेल के कनस्तर और प्लास्टिक का कबाड़। दिवाली की सफाई के चलते रोज भारी कबाड़ यहां आ रहा है। मैरिज गार्डन की वजह से बचे खाने की तलाश में कौवे, चील, कबूतरों का झुंड यहां मंडराता रहता है। यही पक्षी उड़कर रनवे की तरफ जाते रहते हैं। एयरपोर्ट के 5 किमी दायरे में खुला कचरा, कबाड़ीखाने और मांस की दुकानें प्रतिबंधित हैं। डीजीसीए की गाइडलाइन भी बर्ड अट्रैक्शन वाली गतिविधि पर रोक लगाती है, लेकिन यहां निगम की नजर ही नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली। मौके पर न तो निगम का लाइसेंस लगा है, न ही एयरपोर्ट अथॉरिटी की कोई चेतावनी। एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दी और दिवाली के समय बर्ड एक्टिविटी बढ़ जाती है। ऐसे में तुरंत सफाई और कार्रवाई जरूरी है। एयरपोर्ट के नजदीक रहने वाले सोशल वर्कर रामावतार जांगिड़ कहते हैं कि निगम को इस मामले में तुरंत ही एक्शन लेना चाहिए। पिछले सालों में बर्ड हिट से जुडे़ बड़े केस