धौलपुर जिला मुख्यालय और ग्रामीण इलाकों में शरद पूर्णिमा पर टेसू-झांझी पर्व खत्म हो गया। इस मौके पर महिलाओं और बालिकाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाकर पुरानी परंपराओं को जिंदा रखा। बच्चों में भी पर्व को लेकर काफी उत्साह था। दशहरा के बाद से यह परंपरा शुरू होती है। बच्चे टेसू और झांझी को सजाकर घरों व बाजारों में जाते हैं। वे समूह में गीत गाते हुए लोगों के दरवाजों पर जाते और उपहार लेते हैं। गलियों, मोहल्लों में बच्चों की चहल-पहल रहती है। पर्व के समापन पर महिलाओं और बालिकाओं ने गीत गाकर इस लोक परंपरा को आगे बढ़ाया। गीत-संगीत और मेल-मिलाप से इलाके में खुशी का माहौल रहा। टेसू-झांझी पर्व की रौनक खत्म हो गई। यह पर्व ग्रामीण लोक संस्कृति का अहम हिस्सा है। यह बच्चों को विरासत से जोड़ता है और मेलजोल का मौका देता है। आधुनिकता के दौर में भी यह परंपरा ग्रामीण संस्कृति से लोगों के जुड़ाव को दिखाती है।