डीडवाना में खाद, बीज, कीटनाशक व्यापारियों ने अपनी लंबित मांगों और व्यापारिक समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। ‘एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन’ (AIDA) के आह्वान पर जिले सहित देशभर में व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा। इस कदम से कृषि व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। उनकी 12 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से उर्वरक कंपनियों द्वारा जबरन 'टैगिंग' पर रोक लगाना और इसे अपराध घोषित करना शामिल है। इसके अलावा, खाद की डिलीवरी सीधे बिक्री केंद्रों तक (FOR) करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। अन्य मांगों में डीलर मार्जिन को बढ़ाकर न्यूनतम 8% करना, सैंपल फेल होने पर विक्रेता को दोषी न मानकर जिम्मेदारी कंपनी पर तय करना और एक्सपायर्ड स्टॉक की अनिवार्य वापसी का प्रावधान शामिल है। व्यापारियों ने 'SATHI' पोर्टल की अनिवार्यता केवल थोक विक्रेताओं तक सीमित करने की भी मांग की है। ज्ञापन में नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 के कुछ प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई गई है। व्यापारियों का कहना है कि रिटेल डीलरों को 'प्रथम पक्ष' बनाने से उन पर अनावश्यक कानूनी दबाव बढ़ेगा। उन्होंने लाइसेंस निलंबन के मामलों में 21 दिन में स्वत: बहाली और झूठी शिकायतों की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति गठित करने की मांग की। व्यापारियों के अनुसार वे पिछले एक दशक से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो खरीफ सीजन के दौरान व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। इसका सीधा असर किसानों और कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। कृषि आदान व्यापारियों का यह आंदोलन फिलहाल एक चेतावनी के रूप में सामने आया है। हालांकि, यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो यह एक बड़ा रूप ले सकता है, जिससे कृषि आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान आने की आशंका है।