‘मेरा टारगेट RAS ही बनना था। इसी लक्ष्य को सामने रखकर तैयारी की। दूसरे किसी भी कॉम्पिटिशन में नहीं उलझा। पहले ही प्रयास में 622वीं रैंक बनाई। संतुष्ट हूं लेकिन सफर जारी है।’ ये कहना है टोंक जिले के आवां गांव के दिव्य भारद्वाज का। RAS की फाइनल परीक्षा में पहली कोशिश में उन्होंने रैंक बनाई। दिव्य के पिता देवेंद्र और और मां गायत्री शर्मा दोनों शिक्षक हैं। बड़े भाई दिव्यांश आवां सरपंच (प्रशासक) हैं। पूरे परिवार का मिला समर्थन दिव्या ने बताया- मेरे चाचा महेंद्र भारद्वाज पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रेस सलाहकार रहे, भाइयों में सरपंच दिव्यांश, इंजीनियर मुदित, व्यवसायी पवन और शिक्षक माता-पिता का भरपूर मार्गदर्शन और समर्थन मिला। यह मेरी सबसे बड़ी ताकत बना। इन्हीं से प्रेरणा मिली कि अधिकारी बनकर समाज और परिवार का नाम रोशन करूं। कठिन समय में धैर्य नहीं खोया दिव्य ने कहा- एकाग्र होकर नियमित पढ़ाई की। घर में सकारात्मक माहौल था। कठिन समय भी आया लेकिन धैर्य नहीं खोया। अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। पहले प्रयास में ही सफलता मिली। घर के अलावा जयपुर और कोटा में रहकर भी तैयारी की। रैंक से संतुष्टि, लेकिन लक्ष्य अभी बाकी अपनी रैंक को लेकर दिव्य ने संतोष जताया। कहा- और बेहतर करने की इच्छा है। फिलहाल यह रैंक मेरे लिए संतोषजनक है। आगे और मेहनत करूंगा ताकि परिवार और क्षेत्र का नाम और ऊंचा कर सकूं। दिव्य की इस उपलब्धि से आंवा गांव सहित पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल है। ग्रामीणों और परिजनों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।