1. ​चिकित्सा एवं ऑपरेशन थियेटर: सेंटर में एक सर्वसुविधायुक्त ऑपरेशन थियेटर, प्री-ओटी कक्ष, स्क्रब एरिया, पोस्ट-ओटी कक्ष और मेडिकल स्टोर बनाया जाएगा। इससे श्वानों की नसबंदी और उपचार सुचारू रूप से हो सकेगा। 2. ​शेल्टर होम्स एवं केनल्स: इसमें अलग-अलग कवर्ड शेल्टर हॉल, केनल हॉल और बीमार या हिंसक श्वानों के लिए क्वारंटाइन/आइसोलेशन केनल बनाए जाएंगे। 3. ​एडमिन रूम बनाया जाएगा: प्रशासनिक कार्यों के लिए एडमिन रूम, स्टाफ रूम, वेटिंग एरिया, लॉबी, डिसइंफेक्शन रूम और एक बड़ी रसोई तैयार की जाएगी। 4. ​ओपन कोर्ट व ग्रीन एरिया: श्वानों के घूमने के लिए केनल कोर्ट के ऊपर टिन शेड लगाया जाएगा। बीच में 220 वर्ग फीट का हरा-भरा क्षेत्र भी विकसित होगा। 5. ट्यूबवेल व सबमर्सिबल पंप लगेगा: परिसर की सुरक्षा के लिए 200 मीटर लंबी मजबूत बाउंड्री वॉल बनेगी। फेंसिंग भी होगी। आंतरिक व मुख्य सड़कों के लिए 2000 वर्ग मीटर का सीसी रोड वर्क होगा। पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए 100 मीटर गहरा ट्यूबवेल और सबमर्सिबल पंप स्थापित किया जाएगा। श्रीगंगानगर| आमजन की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा की पालना में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में चरणबद्ध रूप से डॉग शेल्टर्स का निर्माण करवाया जाएगा। इस संबंध में स्वायत्त शासन विभाग के निदेशालय स्थानीय निकाय (डीएलबी) की ओर से राज्य के सभी नगर निगमों और नगर परिषदों को दिशा-निर्देश और मॉडल डिजाइन जारी कर दिए गए हैं। ​निदेशक एवं विशिष्ट सचिव जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर ने जारी पत्र में सभी नगरीय निकायों को अपनी उपलब्ध जमीन और मौके की स्थिति के अनुसार मॉडल डिजाइन और तकमीने में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही इस कार्य के लिए 15 जुलाई से पहले अनिवार्य रूप से निविदा प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। ​इस योजना के धरातल पर उतरने से न सिर्फ शहरों में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, बल्कि रेबीज जैसी घातक बीमारियों की रोकथाम होगी। आमजन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। प्रत्येक डॉग शेल्टर और एबीसी (Animal Birth Control) सेंटर के निर्माण पर लगभग 1.75 करोड़ रुपए (कुल अनुमानित लागत 1,74,76,974 रुपए) खर्च होंगे। यह पूरा बजट प्राकलन आरयूआईडीपी एसओआर 2023 के मानकों पर तैयार किया गया है। इस बजट घोषणा को धरातल पर उतारने के लिए नगरीय निकायों को ही कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। ​मॉडल प्लान के अनुसार इस डॉग शेल्टर का कुल बिल्डिंग फुटप्रिंट 108 गुणा 73 फीट होगा। बेसहारा श्वानों को रखने और उनकी चिकित्सा के लिए इसे बेहद आधुनिक और व्यवस्थित तरीके से डिजाइन किया गया है। इसलिए जरूरी डॉग शेल्टर: श्रीगंगानगर जिले में हर रोज डॉग बाइट से 50 से ज्यादा केस आते है। वहीं बीते 4 माह में रेबीज के 2 लोगों की मौत भी हो गई थी। जयपुर के बाद श्रीगंगानगर में ही सबसे अ​घिक डॉग बाइट के केस है।