दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर रोक लगा रखी है। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे वाहनों को खड़ा करने पर भी प्रतिबंध है। लेकिन भरतपुर में इन नियमों की सबसे बड़ी अनदेखी खुद सरकारी तंत्र कर रहा है। बीते 6 माह में ही 83 चालान हो चुके हैं, जिन पर 3.85 लाख जुर्माना लगाया गया। वहीं 666 को एनओसी जारी की गईं। भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि जिले के सरकारी विभागों के 290 डीजल वाहन 10 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जबकि 236 सरकारी वाहन बिना वैध फिटनेस के हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि जिले के सरकारी विभागों के 290 डीजल वाहन 10 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जबकि 236 सरकारी वाहन बिना वैध फिटनेस के हैं। वहीं परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 35,887 ओवरएज वाहन अब भी दर्ज हैं। इनमें ट्रैक्टर, बस, कार, मालवाहन और 18 हजार से अधिक मोटरसाइकिलें शामिल हैं। सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिन विभागों पर नियम लागू कराने की जिम्मेदारी है, उनके अपने वाहन ही नियमों के दायरे में हैं। जबकि एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक है। रसद अधिकारी की बोलेरो का रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका 15 वर्ष से ज्यादा पुराने वाहन जिला पूल में 3 वाहन कंडम स्थिति में हैं। जिले में जो भी ओवरएज वाहन हैं उनको भी बाहर करने के लिए डीटीओ व आरटीओ से बात करेंगे। - राहुल सैनी, एडीएम सिटी ऐसे वाहन पोर्टल पर डीरजिस्टर्ड हो जाते हैं। इसके अलावा पकड़े जाने पर एनओसी निकाली जाती है और जुर्माना भी पांच लाख तक है। - अभय मुदगल, जिला परिवहन अधिकारी, भरतपुर