एसएमएस मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग से रिटायर्ड डॉ. धनंजय अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां पोस्ट खाली नहीं थी इसलिए पहले पे माइनस पेंशन के आधार पर अजमेर मेडिकल कॉलेज में लगाने के ऑर्डर हुए थे। वहां जॉइन नहीं किया तो नया रास्ता निकालते हुए इमरजेंसी मेडिसिन विशिष्टता के खाली पद पर लगाकर नेफ्रोलॉजी में लगा दिया गया। अब नेफ्रो के विभागाध्यक्ष ने हेड बनाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। खास बात यह है कि नेफ्रोलॉजी में 2015 से दो ही यूनिट चल रही है, अब डॉ. अग्रवाल के लिए तीसरी यूनिट बनाई गई है। इस आदेश के बाद राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन विरोध में उतर आया है। बता दें कि डॉ. धनंजय 31 मई को रिटायर्ड हो गए थे। इसके बावजूद सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक स्थित उनके चैंबर की नेम प्लेट एक महीने तक नहीं हटाई गई और ताला भी नहीं खोला गया। भास्कर ने इस कारण 10 किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों की फाइलें नहीं मिलने और उनका उपचार अटकने का खुलासा किया था। नियमों को बाईपास कर जिम्मेदारी ‘ट्रांसप्लांट’, सरकार की मंजूरी जरूरी कार्मिक विभाग के वर्ष 2019 के आदेश के अनुसार, पुनर्नियुक्त सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी को किसी अन्य पद का अतिरिक्त कार्यभार नहीं दिया जा सकता। अगर विभाग ऐसा करना आवश्यक समझता है तो उसे कार्मिक और वित्त विभाग की सहमति लेना होती है। इसके बाद मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। शिक्षण-उपचार करवाएं : टीचर्स आरएमसीटीए अध्यक्ष डॉ. धीरज जैफ ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को पत्र लिखकर विरोध जताया है। इसमें कहा कि रिटायर्ड डॉक्टरों को यूनिट प्रभारी या प्रशासनिक जिम्मेदारी देने से नियमित चिकित्सक शिक्षकों के नेतृत्व विकास, पदानुक्रम और कॅरियर उन्नति के अवसर प्रभावित होते हैं। जिम्मेदारियां वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर नियमित को दी जानी चाहिए। रिटायर्ड का उपयोग शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और मरीजों के उपचार तक सीमित रखना चाहिए। यूनिट हेड का प्रस्ताव भेजा है : डॉ. मल्होत्रा तीसरी यूनिट शुरू करने और डॉ. धनंजय अग्रवाल को यूनिट हेड बनाने के लिए प्रिंसिपल को प्रस्ताव भेजा है। निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई करेंगे। -डॉ. विनय मल्होत्रा, विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी, एसएमएस