डूंगरपुर शहर की ऐतिहासिक जलधरोहरों को संवारने के लिए नगर परिषद ने सफाई और संरक्षण का अभियान तेज कर दिया है। गेपसागर झील से लेकर सुनरिया और साबेला तालाब तक जलीय झाड़ियों, कंटीले पौधों और गंदगी को हटाया जा रहा है। तीनों जलाशयों में 11 नावों और 15 श्रमिकों की टीम लगाई गई है। सभापति सुशीला गुप्ता के निर्देश पर शुरू हुई इस पहल में जलाशयों की सफाई के साथ उनके सौंदर्यीकरण की भी तैयारी है। वहीं, गेपसागर में सोम कमला आंबा बांध से पानी लाकर जलस्तर बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। नावों से निकाली जा रही जलीय झाड़ियां नगर परिषद की टीम नावों की मदद से जलाशयों में फैली कमल दल की झाड़ियों, कंटीले पौधों और अवांछित वनस्पति को निकाल रही है। गेपसागर में पांच नावों और आठ श्रमिकों को लगाया गया है। सुनरिया तालाब में दो और साबेला तालाब में चार नावें सफाई कर रही हैं। दोनों तालाबों में सात श्रमिक काम कर रहे हैं। जलाशयों के किनारों पर जमा गंदगी और वनस्पति भी हटाई जा रही है, ताकि पानी का खुला हिस्सा बढ़े और झीलों का स्वरूप बेहतर हो। 60 हजार शहरवासियों की आस्था का केंद्र गेपसागर स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर केके गुप्ता ने कहा कि गेपसागर शहर की शान और करीब 60 हजार नागरिकों की आस्था का केंद्र है। यह केवल जलाशय नहीं, बल्कि डूंगरपुर की ऐतिहासिक पहचान है। उन्होंने कहा कि सोम कमला आंबा बांध से पानी लाकर गेपसागर को लबालब भरने की तैयारी की जा रही है। पर्याप्त पानी रहने से झील की सुंदरता और निखरेगी। सुनरिया-साबेला के सौंदर्यीकरण की तैयारी केके गुप्ता ने कहा कि गेपसागर के साथ सुनरिया और साबेला तालाब का संरक्षण भी जरूरी है। दोनों तालाबों के सौंदर्यीकरण का काम जल्द शुरू कराने की तैयारी है। नगर परिषद का लक्ष्य तीनों जलाशयों को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। उन्होंने शहरवासियों से ऐतिहासिक जलधरोहरों को साफ रखने और उनके संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।