डूंगरपुर जिले में इस साल की वन्यजीव गणना ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। कुल वन्यजीवों की संख्या में करीब 1578 की कमी दर्ज हुई है, लेकिन राहत की बात यह है कि लेपर्ड की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या में 1110 की भारी गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। बुद्ध पूर्णिमा पर 24 घंटे चला विशेष अभियान वन विभाग ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जिले के 42 वॉटर होल्स पर 24 घंटे का विशेष गणना अभियान चलाया। इस अभियान में 110 वनकर्मियों ने भाग लिया और पूरे जिले में वन्यजीवों की स्थिति का आकलन किया गया। कुल वन्यजीवों की संख्या में गिरावट इस वर्ष जिले में कुल 8019 वन्यजीव दर्ज किए गए, जो वर्ष 2025 के 9597 के मुकाबले 1578 कम हैं। यह गिरावट वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से चिंता का विषय मानी जा रही है। पैंथर की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी इस बार गणना में 36 लेपर्ड (पैंथर) दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष 21 थे। यानी एक साल में 15 लेपर्ड की वृद्धि हुई है। पिछले वर्षों के आंकड़े: 2022: 21 2024: 18 2025: 21 2026: 36 यह बढ़ोतरी वन विभाग के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। किन प्रजातियों में हुआ इजाफा गणना के अनुसार इस वर्ष लोमड़ी, लंगूर, मगरमच्छ, सारस और लेपर्ड की संख्या में वृद्धि हुई है। खासतौर पर लंगूर की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मोर सहित कई प्रजातियों में गिरावट दूसरी ओर नीलगाय, खरगोश, गिलहरी, सियार, जरख, मोर, बिल्ली और जंगली बिल्ली जैसे वन्यजीवों की संख्या में कमी आई है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जिले में मोर की संख्या में करीब 1110 की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा गिद्ध लगभग गायब हो चुके हैं, जो पर्यावरण के लिए गंभीर संकेत है। पिछले वर्षों का तुलनात्मक आंकड़ा 2022: 8730 2024: 6426 2025: 9597 2026: 8019 प्रमुख वन्यजीवों की वर्तमान स्थिति (2026) नीलगाय: 1652 लंगूर: 1410 मोर: 2807 जंगली सूअर: 1563 सेही: 111 जंगली बिल्ली: 60 लोमड़ी: 30 जरख: 53 सियार: 142 बिज्जू छोटा: 41 सारस: 18 पैंथर: 36 मगरमच्छ: 13 जंगली मुर्गा: 8 नई प्रजातियां नहीं मिलीं वन विभाग के अनुसार इस बार की गणना में कोई नई प्रजाति सामने नहीं आई है। मोर की भारी कमी चिंता का विषय डूंगरपुर में वन्यजीवों की कुल संख्या में गिरावट और मोर की भारी कमी चिंता का विषय है, जबकि लेपर्ड और कुछ अन्य प्रजातियों में वृद्धि राहत देती है। अब जरूरत है कि संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत किया जाए, ताकि जैव विविधता का संतुलन बना रहे।