नगर निगम उदयपुर चुनाव-2026 में 11 सितंबर को हुए मतदान के बाद सोमवार को आरसीए परिसर में सुबह 8 बजे से मतगणना होगी। 80 वार्डों के चुनावी समर में उतरे 220 प्रत्याशियों में से 80 विजेता पार्षदों की घोषणा होगी। निगम बोर्ड पर भाजपा का लगातार 7वीं बार कब्जा होगा या कांग्रेस 30 साल बाद वापसी करेगी, इसकी तस्वीर दोपहर 12 से 1 बजे तक साफ हो जाएगी। भाजपा के सभी 80 प्रत्याशी भीलवाड़ा में बाड़ेबंदी में हैं। जीतने वाले प्रत्याशी मेयर चुनाव तक बाड़ेबंदी में रहेंगे, जबकि हारने वालों को मुक्त कर दिया जाएगा। भाजपा को अपनों की बगावत का डर है, इसलिए वह प्रत्याशियों को मतगणना स्थल पर नहीं लाएगी। मेयर चुनाव के समय ही पार्षदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी, ताकि वे मेयर-डिप्टी मेयर के लिए मतदान कर सकें। अगर भाजपा-कांग्रेस के विजेता पार्षदों में अंतर 5-10 सीट का रहा तो निर्दलीय व अन्य दलों के संभावित 5-8 पार्षदों की मांग-मान-मनुहार बढ़ेगी। दोनों दल एक-दूसरे के पार्षदों को तोड़ने की कोशिश भी करेंगे। ऐसी स्थिति में कांग्रेस आनन-फानन में बाड़ेबंदी करेगी, जिसकी अंदरखाने तैयारी हो चुकी है। औसतन 2 पार्षदों की सुरक्षा में 1 बाउंसर तैनात करने की योजना है। बगावत का खौफ : प्रत्याशियों को गणना पर नहीं लाएगी भाजपा उदयपुर भाजपा में मेयर पद के लिए प्रमोद सामर, पारस सिंघवी, दिनेश भट्ट, अतुल चंडालिया, महेंद्र सिंह शेखावत, यशवंत आंचलिया और आकाश वागरेचा के बीच घमासान है। कांग्रेस में हितांशी शर्मा, पूनम राठौड़ और अरुण टांक के बीच मेयर/नेता प्रतिपक्ष बनने की जंग है। सूत्रों के अनुसार दोनों दलों के कुछ नेता एक-दूसरे के सियासी गठजोड़ के सहारे मेयर पद हासिल करने की कोशिश में हैं। प्रदेश नेतृत्व को इसकी भनक लग चुकी है और क्षेत्रीय नेताओं से पल-पल की अपडेट ली जा रही है। भाजपा में दावेदारों का विरोध बढ़ा तो संघ विचारधारा के किसी निर्विवाद, चुनाव नहीं लड़ने वाले चेहरे को मेयर बनाने का विकल्प भी खुला है। बाद में एक सीट खाली कर उसे पार्षद बनाया जा सकता है। ऐसे आएगा परिणाम विजय जुलूस, आतिशबाजी पर रहेगा प्रतिबंध नगर निकाय आम चुनाव-2026 की मतगणना के दौरान कानून-व्यवस्था के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस, भीड़ एकत्र करना, वाहनों के काफिले, पटाखे-आतिशबाजी और उत्तेजक नारेबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। शपथ अनिवार्य, बिना इसके न पर्चा, न वोट मतगणना में किसी प्रत्याशी या राजनीतिक दल के पार्षदों की गैर-मौजूदगी से परिणाम पर असर नहीं पड़ेगा। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 37 के तहत चुनाव जीतने के बाद हर प्रत्याशी को रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के समक्ष पद एवं गोपनीयता की शपथ लेना अनिवार्य है। मेयर चुनाव में मतदान से पहले सभी विजयी पार्षदों को शपथ लेनी होगी। बिना शपथ प्रक्रिया पूरी किए कोई निर्वाचित सदस्य मेयर के चुनाव में मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकेगा। शपथ मेयर चुनाव से पहले कभी भी ली जा सकती है। पार्षद निर्वाचित हुए बिना भी इस पद की योग्यता रखने वाला व्यक्ति मेयर बन सकता है, जिसकी विधिक प्रक्रिया बाद में पूरी की जा सकेगी। मनीष शर्मा, अधिवक्ता व डॉ. गिरिराज सिंह चौहान, विभागाध्यक्ष, सुविवि लोक प्रशासन