स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिक्षा के अधिकार, और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण को लेकर मंगलवार को जिलेभर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान के तहत न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को सुरक्षा मानकों और उनके विधिक अधिकारों की जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव (एडीजे) दिनेश कुमार जलुथरिया ने बताया कि प्राधिकरण अध्यक्ष व जिला जज मीनाक्षी शर्मा के मार्गदर्शन में जिले में कार्यक्रम आयोजित हुए। ऊम स्थित देव बाल विद्या निकेतन माध्यमिक स्कूल में विद्यार्थियों को संबोधित कर जलुथरिया ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए स्कूल में सुरक्षित वातावरण जरूरी है। इसके लिए सुरक्षित कक्षाएं, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, खेल मैदान, विद्युत सुरक्षा, और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। इसी क्रम में पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने सेंट सोल्जर बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया। एससी-एसटी प्रकरणों की न्यायाधीश आरती माहेश्वरी, एडीजे स्वाति व्यास, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज फौजदार, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1 आशिमा माथुर, व अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 गजपाल सिंह, न्यायिक मजिस्ट्रेट तनिषा मेहरा, अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेया गोयल, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रकरणों के विशिष्ट न्यायाधीश नीरज भारद्वाज, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरणों के विशिष्ट न्यायाधीश, और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के न्यायाधीश ने टोंक के विभिन्न स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए। मालपुरा, निवाई, देवली, उनियारा, टोडारायसिंह, और पीपलू तालुकाओं में भी शिविर आयोजित हुए। असुरक्षित स्थिति दिखे तो शिक्षकों को बताएं : कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों और स्कूलों में जरूरी आधारभूत सुविधाओं की जानकारी दी गई।