श्री जयमल जैन स्थानक में धर्मसभा हुई। इसमें साध्वी प्रफुल्ल प्रभा व साध्वी वैराग्य पूर्णा ने भी प्रवचन किया। दोनों साध्वी ने आंखों के सदुपयोग, दुरुपयोग पर विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि आंखें परमात्मा की अनमोल देन हैं। इनसे संसार की वस्तुएं दिखती हैं। धार्मिक ग्रंथ, शास्त्र पढ़े जाते हैं। प्रभु के दर्शन होते हैं। आंखों की सार्थकता केवल देखना नहीं। जीवन में सदाचार, संयम, धर्म का पालन भी जरूरी है। आंखों से किसी व्यक्ति या वस्तु को देखने के बाद मन में आकर्षण पैदा होता है। मन पर नियंत्रण नहीं रहा तो आकर्षण मोह बनता है। आसक्ति बढ़ती है। मन की चंचलता रोकने के लिए आंखों पर संयम जरूरी है। साध्वीजी ने उदाहरण दिया। माता सीता के रूप-दर्शन के बाद रावण आसक्त हो गया। विनाश भी भूल गया। इससे सीख मिलती है। आंखों का दुरुपयोग पतन की ओर ले जाता है। दृष्टि पवित्र रखनी चाहिए। सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने धर्मप्रेमियों से कहा कि जीवन में संयम अपनाएं। विवेक रखें। सदाचार अपनाएं। इंद्रियों पर नियंत्रण रखें। आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ें। धर्मसभा में श्री जयमल जैन श्रावक संघ, श्री जयमल जैन श्राविका मंडल रायपुर के सदस्य मौजूद रहे। अन्य धर्मप्रेमी भी उपस्थित रहे।