भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के इच्छुक किसानों के सामने अब एक और समस्या खड़ी हो गई है। पहले गुणवत्ता में छूट की गुहार लगा रहे थे, अब उत्पादन के मुकाबले बहुत कम मात्रा में खरीद होने से परेशान हैं। एक बीघा में 6 क्विंटल या इससे अधिक गेहूं की पैदावार वाले किसान से खरीद केंद्र पर प्रति बीघा एक-दो क्विंटल ही गेहूं लिया जा रहा है। भास्कर टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि जिले में इस वर्ष कृषि विभाग ने औैसत उपज की सूचना ही तैयार नहीं की। जबकि एफसीआई का तर्क है कि पोर्टल पर औैसत उपज की उपलब्ध जानकारी के आधार पर निर्धारित मात्रा में खरीद कर रहे हैं। अंदरखाने यह भी सामने आया कि पिछले वर्ष की औैसत उपज के आधार पर ही खरीद शुरू की गई है। भारतीय किसान संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष रणछोड़ पाटीदार का कहना है, गेहूं खरीद में पहले गुणवत्ता और अब तुलाई की मात्रा को लेकर मनमानी की जा रही है। एक तिहाई खरीद भी नहीं की जा रही है, किसान परेशान हो रहे हैं। केस-01: मादलदा के किसान महिपाल पाटीदार ने बताया, मैंने 6 बीघा में गेहूं उगाया। 23 मार्च को पंजीयन कराया तब अधिकतम 80 क्विंटल गेहूं खरीदने की मात्रा तय कर 8 अप्रेल की तारीख दी गई। फिर 5 अप्रेल को मैसेज आया कि मेरा 6.42 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जाएगा। पैदावार 35 क्विंटल हुई है, बाकी गेहूं कहां बेचेंगे? केस-02: गनोड़ा के किसान शांतिशंकर व्यास ने बताया, मैंने 12 बीघा में गेहूं बोया, 100 क्विंटल पैदावार हुई। मैंने 25 मार्च को पंजीयन कराया था लेकिन मेरी पैदावार ही शून्य बता दी गई है। इस संबंध में मैंने शिकायत की तो जवाब मिला कि गिरदावारी के बाद कोई गड़बड़ी हुई है। एफसीआई बांसवाड़ा के गुणवत्ता प्रबंधक महेंद्र कुमार सोनी का कहना है, एफसीआई तो पोर्टल पर दर्ज औैसत उपज के आधार पर खरीद करता है। यह हमेशा का प्रावधान है। यह जानकारी हमें राज्य सरकार से दी जाती है। हां, पिछले दिनों पोर्टल पर कुछ तकनीकी समस्या थी, सिलिए खरीद की मात्रा तय करने में गफलत हुई है। लेकिन अब उसका समाधान हो चुका है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाश चंद्र मीणा का कहना है, विभाग हर साल औैसत उपज की सूचना तैयार कर भेजता है। इस साल यह सूचना तैयार ही नहीं की गई है। हमसे इस बार कोई जानकारी मांगी ही नहीं गई।