भास्कर न्यूज | बाड़मेर कृषि में बदलते वैश्विक माहौल में संतुलित उर्वरक प्रबंधन सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए कृषि महोत्सव जैसे आयोजन नींव के पत्थर साबित होंगे। यह बात अटारी डायरेक्टर डॉ. जे पी मिश्रा ने बुधवार को भाड़खा में किसानों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर व ग्रामीण एकीकृत आजीविका परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में कृषक महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सेवा राम कुमावत ने महोत्सव की सराहना की। उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक से अधिक अपनाने पर जोर दिया। इससे पहले प्रधान वैज्ञानिक व अध्यक्ष गुड़ामालानी डॉ. प्रदीप पगारिया ने मेहमानों और किसानों का स्वागत किया। उन्होंने महोत्सव की रूपरेखा बताई। डॉ. पगारिया ने कहा कि यह कृषक महोत्सव 23 ग्राम पंचायतों और 91 गांवों से होकर गुजरेगा। रथ के जरिए किसानों को कृषि और पशुपालन के नवाचारों की जानकारी दी जाएगी। कृषि महाविद्यालय, बायतु के डॉ. भूपेंद्र भारद्वाज ने किसानों से बच्चों को कृषि संकाय से जोड़ने की अपील की। उन्होंने वैज्ञानिक प्रबंधन आधारित प्राकृतिक खेती पर जोर दिया। केवीके दांता के प्रधान वैज्ञानिक और अध्यक्ष डा. विनय कुमार ने केवीके की गतिविधियों की जानकारी दी। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रावता राम भाखर ने पशुपालन विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मंगला पशु बीमा योजना, ऊष्ट संरक्षण योजना, पशुओं में नियमित टीकाकरण, कर्मीनाशक के उपयोग, वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में हरियाली नाड़ी के प्रधानाचार्य चूनाराम कुमावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डॉ. गीतेश मिश्र, श्याम दास, बुधाराम मोरवाल, मनप्रीत सिंह, अनिल कुमार मौजूद रहे।