भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। सभी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू भेजा, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी बीच एमसीएच के ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच (कल्चर टेस्ट) रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं, बांसवाड़ा के सरकारी हॉस्पिटल में भी शुक्रवार (10 जुलाई) सुबह दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों ने पहली बार संतान को जन्म दिया था। इससे पहले मई में कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। दो की इलाज के दौरान मौत हुई थी। सभी केसों में गंभीर लापरवाही के आरोप भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में इस साल मार्च से अब तक कुल 9 प्रसूताओं की मौत हुई है। इनमें से 5 मौत इसी जुलाई में अब तक हुई हैं। सभी केसों में परिजनों ने हॉस्पिटल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शुक्रवार (10 जुलाई) को जिले के पोटला निवासी संगीता जीनगर (32) तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में हंगामा भी किया था। डेली 30-40 ऑपरेशन, लेकिन उपकरणों के सिर्फ 5 सेट एमसीएच में सिजेरियन ऑपरेशन के लिए नियमित उपयोग के केवल पांच और इमरजेंसी के तीन सर्जिकल सेट हैं। जबकि यहां रोज 30 से 40 सिजेरियन हो रहे हैं। किसी भी सर्जिकल सेट को दोबारा उपयोग से पहले तय स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कम से कम तीन घंटे लगते हैं। लेकिन ऑपरेशन का दबाव क्षमता से कहीं अधिक होने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। ओटी की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने से संक्रमण की आशंका ने हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हॉस्पिटल प्रशासन ने क्या कहा? महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ अरुण गौड़ का कहना है कि - अस्पताल में किसी तरह की लापरवाही सामने नहीं आई है। अधिकांश मरीज पहले से रेफर होकर गंभीर स्थिति में यहां पहुंचते हैं। चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण ऐसी मौतें हो जाती हैं। वहीं, मातृ और शिशु चिकित्सालय प्रबंधन का कहना है कि मौतों की वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, सीजर पीआईएच, एक्लेम्पिसया और अन्य प्रसूति जटिलताएं रहीं। बांसवाड़ा में भी 2 प्रसूताओं की मौत, इंजेक्शन के सैंपल लिए बांसवाड़ा के भी महात्मा गांधी हॉस्पिटल में शुक्रवार सुबह दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों ने पहली बार संतान को जन्म दिया था। आईसीयू में भर्ती सवनिया निवासी लक्ष्मी गंभीर एनीमिया (शरीर में खून की कमी) से पीड़ित थीं, जबकि कानेला निवासी लीला की मौत बीपी बढ़ने से हुई। मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने पांच डॉक्टरों की टीम गठित की है। वहीं, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड से इस्तेमाल किए गए तीन इंजेक्शनों के सैंपल भी लिए गए हैं। 2 और प्रसूताओं की मौत की आशंका हॉस्पिटल से जुड़े सूत्रों का कहना है बीते कुछ दिनों में 2 और प्रसूताओं की मौत हुई है। इनमें से एक की मौत ऑपरेशन के बाद हुई थी। वहीं, एक गर्भवती युवती को इमरजेंसी में भर्ती किया गया था। जहां आईसीयू में उसकी मौत हुई थी। हालांकि, इन दोनों मौतों को लेकर हॉस्पिटल प्रशासन ने कोई पुष्टि नहीं की है। …. राजस्थान में प्रसूताओं की मौत से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… कोटा मेडिकल कॉलेज में हुई हर मौत की वजह अलग:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की जान गई थी, जांच रिपोर्ट आई कोटा में 5 प्रसूताओं (महिलाओं) की मौत के असल कारण सामने आ गए हैं। 3 अलग-अलग जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर हाई लेवल कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी है। पूरी खबर पढ़िए…