कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाने के लिए उन्हें जबरन अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं शुक्रवार देर शाम तक चले कांग्रेस के आदिवासी सम्मेलन में पायलट का अलग अंदाज भी देखने को मिला। जहां वह मीणा समाज की पारंपरिक कन्हैया पद दंगल में कांग्रेस के समर्थन और भाजपा पर राजनीतिक तंज वाले लोक पदों पर वे मुस्कुराते हुए तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। शनिवार को टोंक के दो दिवसीय दौरे के दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में पायलट ने कहा कि जिस तरीके से वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाया गया, उससे केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है। लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन सरकार आंदोलनों को दबाने का प्रयास कर रही है। पायलट ने कहा कि सरकार को वांगचुक से संवाद करना चाहिए था, लेकिन उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय बलपूर्वक कार्रवाई की गई। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और पेपर लीक मामले को लेकर भी केंद्र सरकार के रवैये पर कहा कि देशभर, खासकर युवाओं में सरकार की नीतियों को लेकर गहरा आक्रोश है। कांग्रेस हमेशा युवाओं और जनता की न्यायसंगत मांगों के साथ खड़ी रहेगी।
पायलट ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनाव सरकार हार के डर से टाल रही है। इस मामले में हाईकोर्ट भी सरकार को कई बार फटकार लगा चुका है। शुक्रवार शाम को आयोजित कांग्रेस के आदिवासी सम्मेलन में संगठन महासचिव हरगुण बेपर, संभाग प्रभारी शिवचरण मीणा, पार्टी जिलाध्यक्ष सऊद सईदीं, रामविलास चौधरी, डॉ. सुमित गर्ग, आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष फौजुराम मीणा, पूर्व जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद बैरवा, पूर्व विधायक कमल बैरवा, महिला जिलाध्यक्ष मौसमी मीणा, शिवजीराम मीणा ,मेहमूद शाह, भागचंद गुर्जर, युवा जिलाध्यक्ष हंसराज गुंजल, जिलाध्यक्ष एनएसयूआई हनुमान बेनीवाल, सेवादल जिलाध्यक्ष अब्दुल खालिक, अल्पसंख्यक विभाग जिलाध्यक्ष बरकात हसीन, देवकरण गुर्जर, धर्मेंद्र सालोदिया, रामलाल सैलीवान, युसुफ यूनिवर्सल, कमलेश , भारत वर्मा आदि कार्यकर्ता-पदाधिकारी उपस्थित रहे। पायलट ने टोंक सर्किट हाउस में कलेक्टर टीना डाबी, एसपी रोशन मीणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। समीक्षा के बाद उन्होंने बनास नदी पर बने प्रदेश के सबसे लंबे (3.350 कि.मी.) गहलोद हाई लेवल ब्रिज सहित पूर्ण हो चुकी विकास योजनाओं का जल्द उद्घाटन कर आमजन को उनका लाभ दिलाया जाए। पेयजल व बिजली आपूर्ति, निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए पानी की आपूर्ति का अंतराल कम करने, सड़कों के पैचवर्क तथा लंबित विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। कांग्रेस के आदिवासी सम्मेलन में पायलट का अलग अंदाज देखने को मिला। वह मीणा समाज की पारंपरिक कन्हैया पद दंगल में कांग्रेस की प्रशंसा और भाजपा पर राजनीतिक तंज से भरे लोक पदों पर वे मुस्कुराते हुए तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। बाद में उन्होंने कलाकारों का सम्मान किया और सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार को आदिवासी, पिछड़े और दलित वर्गों के लिए किए गए कार्य सार्वजनिक करने की चुनौती दी। इन वर्गों के अधिकारों और कानूनों की मजबूत नींव कांग्रेस ने रखी है। सम्मेलन के बाद पायलट पंगत में बैठकर दाल-पूड़ी और मालपुओं के पारंपरिक सामूहिक भोज का भी आनंद लिया।