भास्कर न्यूज | अलवर सरिस्का की अलवर बफर रेंज के सिलीसेढ़ तिराहे के समीप स्थित नाका कार्यालय में तैनात फॉरेस्टर अखिलेश डूडी (45) ने सोमवार रात अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही रेंजर शंकर सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी और अकबरपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अखिलेश पिछले करीब एक साल से रीढ़ की हड्डी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि उनका सामान्य रूप से चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया था और वे फील्ड ड्यूटी नहीं कर पा रहे थे। रेंजर शंकर सिंह ने बताया कि अखिलेश डूडी करीब छह वर्षों से उमरैण वन नाके पर तैनात थे। सोमवार रात करीब 9:30 बजे तक वे नाके पर तैनात होमगार्डके साथ बातचीत कर रहे थे। इसके बाद जवान ऊपर बने कमरे में सोने चला गया। मंगलवार सुबह जब वह नीचे आया और अखिलेश के कमरे में पहुंचा, तो उन्हें पंखे से लटका पाया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आत्महत्या के कारणों का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। मृतक का परिवार खैरथल में रहता है। उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। अखिलेश की हालत को देखते हुए विभाग ने उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटाकर अलवर बफर रेंज के बालाकिला क्षेत्र में वायरलेस ड्यूटी पर लगाने का निर्णय लिया था, ताकि उन्हें राहत मिल सके। डीएफओ सरिस्का अभिमन्यु सहारण ने बताया कि वे लंबे समय से बीमारी से परेशान थे और उन्हें हल्की ड्यूटी देने की प्रक्रिया चल रही थी। मृतक के भाई राजेश ने बताया कि वे बीमारी से परेशान थे। एक-दो दिन में जयपुर दिखाने जाने वाले थे। एक-दो डॉक्टर्स से भी बात कर रखी थी। बीमारी के अलावा घर में कोई परेशानी नहीं थी। चलने-फिरने की दिक्कत के चलते उसने अपना ट्रांसफर बाला किला वायरलैस पर करवाया था, ताकि फील्ड वर्क नहीं करना पड़े। लेकिन, वहां भी ज्वाइन नहीं किया।