स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी के सहयोगी रहे मूलचंद चंदेल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर देश की आजादी में उनके योगदान को याद किया गया। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। इस अवसर पर उनके संघर्ष और देश के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें नमन किया गया। कस्तुरी देवी शैक्षणिक विकास एवं सामाजिक शोध संस्थान की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा गया। इसमें लोागें ने उनके जीवन और देश की आजादी के लिए किए गए संघर्ष के बारे में बताया। दो जून की रोटी कमाने के लिए गए थे अहमदाबाद स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. धर्मवीर चंदेल ने बताया कि मूलचंद चंदेल दो जून की रोटी कमाने के लिए अहमदाबाद गए थे। वहां स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर वे आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। उन्होंने अपने जीवन और व्यवसाय की चिंता किए बिना अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इस दौरान उन्हें जेल की यातनाएं भी सहनी पड़ीं, लेकिन वे अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे। त्याग और संघर्ष से भरा रहा जीवन भारतीय किसान संघ के जयपुर जिला महामंत्री डॉ. लोकेश कुमार ने कहा कि मूलचंद चंदेल ने देश की आजादी को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन त्याग और संघर्ष की मिसाल है। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी मूलचंद चंदेल के पुत्र रामलाल सहित विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मूलचंद चंदेल को श्रद्धांजलि दी और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।