प्रदेश के पहले लहसुन एक्सीलेंस सेंटर की घोषणा को डेढ़ साल से ज्यादा समय गुजर गया, लेकिन परियोजना अब भी कागजों में ही अटकी है। जमीन का आवंटन हो जाने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते जिले के किसानों को अभी भी प्रोजेक्ट को लेकर इंतजार बना हुआ है। लहसुन उत्पादन में प्रदेश में अव्वल बारां जिले के किसानों को अब तक सिर्फ घोषणाओं का इंतजार ही मिला है। शुरुआत में अटरू के गोविंदपुरा में करीब 10 हैक्टेयर भूमि चिन्हित कर आवंटन प्रक्रिया पूरी की गई और फाइल जयपुर भेजी गई, लेकिन वहां से आई विशेषज्ञ टीम ने इस जमीन को अनुपयुक्त करार दे दिया। टीम ने बताया कि जमीन की गहराई कम है और नीचे पथरीली सतह होने से यहां रिसर्च और गुणवत्तापूर्ण खेती संभव नहीं है। इसके बाद अब कवाई क्षेत्र में छबड़ा रोड पर करीब 10 हैक्टेयर जमीन आवंटित कर प्रस्ताव फिर से भेजा गया। जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तीन महीने से ज्यादा समय से फाइल पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। हालात यह हैं कि योजना जमीन मिलने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे पहले राजपुरा क्षेत्र में भी जमीन देखी गई थी, लेकिन वहां की भौगोलिक स्थितियां उपयुक्त नहीं मिलने पर प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था। बड़े क्षेत्र में उपयुक्त जमीन तलाशना ही इस परियोजना में सबसे बड़ी बाधा बना रहा, लेकिन अब जमीन आवंटन के बाद भी काम शुरू नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है। लहसुन उत्पादन में प्रदेश में पहले स्थान पर है बारां बारां जिला लहसुन उत्पादन में प्रदेश में पहले स्थान पर है। वहां इस तरह की सुस्ती चिंता बढ़ाने वाली है। जिले में 30 हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में लहसुन की खेती होती है और हर साल करीब 15 लाख क्विंटल औसत उत्पादन रहता है। बावजूद इसके किसानों को तकनीकी उन्नयन और प्रोसेसिंग सुविधाओं के लिए बनाए जाने वाले इस सेंटर का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। जिले में लहसुन एक्सीलेंस सेंटर के लिए कवायद चल रही है। पहले भूमि चयन को लेकर समय अधिक लग गया। अब कवाई के समीप छबड़ा मार्ग पर करीब 10 हैक्टेयर जमीन आवंटित की है। पहले अटरू के समीप गोविंदपुरा में भूमि का चयन किया था, लेकिन टीम ने उसे अनुपयुक्त मना था। प्रदेश स्तर से निर्देश मिलने पर अग्रिम कार्रवाई शुरू हो गी। - धनराज मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग