श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के अंतर्गत सूरजपोल गेट स्थित बांकेबिहारी मंदिर में नानी बाई का मायरा कथा का दूसरा दिन भक्ति, भाव और चमत्कारिक प्रसंग सुनाए गए। गोवत्स दिव्यांशु महाराज के मुखारविंद से नरसी भक्त की अटूट श्रद्धा और उनके जीवन के कठिन संघर्षों की कथा सुनाई। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष माणक ड़ाणी ने बताया कि प्रातःकाल महेश कुमार व निर्मला वड़ेसरा के मनोरथ से मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाई गई। महोत्सव के दौरान रोज ध्वजारोहण किया जा रहा है और भक्तों की ओर से रोज ही नई ध्वजा चढ़ाई जा रही है। कथाव्यास गोवत्स दिव्यांशु महाराज ने नानी बाई के मायरा प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि जब नरसी भक्त अपनी पुत्री के मायरे के लिए निकले, तो कोई भी उनकी सहायता को तैयार नहीं हुआ। टूटी हुई गाड़ी और वृद्ध बैलों के साथ नरसी जी अपनी यात्रा पर निकले। रास्ते में संकट आने पर साक्षात भगवान द्वारिकाधीश ने किशना खाती का रूप धारण किया। उन्होंने नरसी जी की गाड़ी ठीक की। उन्होंने स्वयं बैलों को हाँकते हुए जूनागढ़ पहुँचाया। महाराज ने भजनों के माध्यम से यह समझाया कि जब नरसी भक्त ने उस रूखे-सूखे भोजन को भगवान को भोग लगाया, तो वह स्वयं ही षटरस भोजन में बदल गया। कथा में “धर तुलसी अर्पण करि, आरोगो बलवीर” के पद के साथ जैसे ही महाराज ने गरम हो गई खिचड़ी, चावल बन गया खीर का प्रसंग सुनाया। इस पावन अवसर पर नंदकिशोर जैथलिया, पुष्पा जैथलिया, सुमित्रा जैथलिया, सोनम जैथलिया, राजकुमार टांक, रोहित पारिख, राधेश्याम ड़ाणी, रिंकू माहेश्वरी, मांगीलाल वड़ेसरा, कमला देवी सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे।