गुजरात सरकार निवेश के लिए जयपुर और अन्य शहरों में रोड शो करके गई तो राजस्थान को अपना रुका निवेश याद आया। प्रदेश में विदेशी कंपनियों से 20 लाख करोड़ रुपए का रुका निवेश लाना टेढ़ी खीर बन गया है। जर्मनी, दुबई, इंग्लैंड, सिंगापुर जैसे 17 देशों की कंपनियां एमओयू करके सुस्त पड़ गईं। उन कंपनियों से 20 लाख करोड़ रुपए का निवेश लाने के लिए अब राजस्थान के आईएएस रोज एक विदेशी कंपनी से संपर्क करेंगे। सबसे बड़ा निवेश 15 लाख करोड़ जर्मनी से और 3 लाख करोड़ रुपए दुबई (यूएई) से आना है। राजस्थान के टॉप 21 आईएएस पर भरोसा करते हुए सरकार ने अगले दिसंबर तक सभी 26 बड़ी विदेशी कंपनियों से प्रोजेक्ट्स को धरातल पर लाने का टास्क दिया है। विदेशों के 500 बड़े इन्वेस्टर्स ने राजस्थान में रुचि दिखाई थी। जनवरी 2026 में ग्लोबल एक्जिबिट में 10000 ने भाग लिया था और 500 निवेशकों ने 300 प्रदर्शनियां लगाकर राजस्थान की धोरा धरती में विकास प्रोजेक्ट्स लाने के वादे किए थे। राजस्थान में निवेश के लिए 32 देशों के प्रतिनिधि आ चुके। 17 देश आधिकारिक रूप से पार्टनर कंट्री हैं। जर्मन कंपनियों के 15 लाख करोड़ आए तो होगा विकास जर्मन फर्म अलबेटरोज प्रोजेक्ट्स, फिक्सबस, परटेक्स एनवी, वाउली टेक्निक्स, इंगो इस्मिट्ज से 15 लाख करोड़ रुपए का इनवेस्टमेंट लाना है। 15 अक्टूबर 2024 को एमओयू हुआ। इन कंपनियों से यह निवेश आया तो धोरा धरती में विकास की गंगा बहेगी। दुबई सरकार ने किया था 3 लाख करोड़ का एमओयू संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और राजस्थान सरकार के बीच रिन्युएबल एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का एक ऐतिहासिक एमओयू हुआ। इसके प्रोजेक्ट्स जल्द राजस्थान लाने और ज्यादा से ज्यादा निवेश का जिम्मा आईएएस डॉ. जोगाराम को दिया गया है। 9 आईएएस को लाने हैं 2 लाख करोड़ इंग्लैंड, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात ‘दुबई’, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, फिनलेंड, आस्ट्रेलिया, स्पेन जैसे देशों से 9 आईएएस को 2 लाख करोड़ रुपए का निवेश लाना है। यूएई की प्रमुख कंपनियों से रिन्युएबल एनर्जी, इंफ्रा और रियल एस्टेट के क्षेत्र में भारी निवेश के एमओयू हुए।