अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में मारे गए कुख्यात डकैत जगन गुर्जर ने तीन साल पहले ही अपनी जान को खतरा बताया था। वर्ष 2023 में उसने तत्कालीन सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। जमानत पर बाहर आने के दौरान वह स्थानीय पुलिस से भी सुरक्षा मांगने पहुंचा था, लेकिन उसे यह कहकर लौटा दिया गया कि डकैत को डर लगने की बात हजम नहीं हो रही और जेल ही उसके लिए सबसे सुरक्षित जगह है। इसके बाद जयपुर में भास्कर से बातचीत में जगन ने अपनी जान पर खतरे और सुरक्षा मांगने के प्रयासों का जिक्र किया था। 2019 में जगन के सरेंडर में भूमिका निभाने वाले एएसआई संतोष ने कहा कि जगन बेहद शातिर, तेजतर्रार और फुर्तीला था। ऐसे व्यक्ति की इस तरह मौत होना हजम नहीं हो रहा, क्योंकि जगन काउंटर अटैक में ताकत और दिमाग दोनों का इस्तेमाल करता था। भास्कर को फोन करके कहा था... सरेंडर करूंगा डकैत जगन गुर्जर ने 27 जून 2019 में भास्कर को फोन करके कहा था कि कल सुबह सरेंडर करूंगा। 28 जून को पुलिस के समक्ष उसने आत्मसमर्पण कर दिया। 4 बार सरेंडर किया... जगन गुर्जर ने चार बार सरेंडर किया था। सबसे पहले 2001 में तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने सरेंडर किया। फरवरी 2022 में उसने करौली पुलिस के सामने अंतिम बार सरेंडर किया।