हनुमानगढ़ में खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेताओं ने सोमवार को एक दिवसीय हड़ताल की। इस दौरान जिलेभर में सभी खाद-बीज की दुकानें बंद रहीं, जिससे कृषि आदान का कारोबार पूरी तरह ठप रहा। यह हड़ताल राष्ट्रीय कृषि आदान संगठन और राजस्थान कृषि आदान संगठन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत की गई थी। विक्रेताओं का मुख्य उद्देश्य कृषि व्यापार में जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और विभागीय नियमों में बदलाव की मांग को सरकार तक पहुंचाना है। जिला कृषि आदान विक्रेता संघ के नेतृत्व में व्यापारियों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भेजा। इस अवसर पर एसोसिएशन अध्यक्ष बालकृष्ण गोल्याण, महासचिव चरणजीत धींगड़ा और कोषाध्यक्ष देवेंद्र बंसल सहित कई व्यापारी मौजूद रहे। ज्ञापन में बताया गया कि देशभर के लगभग पांच लाख कृषि आदान व्यापारी लंबे समय से कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनका समाधान नहीं हो रहा है। इसी के विरोध में 27 अप्रैल को भी सांकेतिक हड़ताल की गई थी। व्यापारियों ने अपनी मांगों में उर्वरक कंपनियों द्वारा की जा रही जबरन लिंकिंग पर रोक लगाने और खाद की आपूर्ति सीधे डीलर के बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8 प्रतिशत करने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त साथी पोर्टल की अनिवार्यता समाप्त करने, अवैध बीजों पर प्रभावी रोक लगाने, एक्सपायर्ड कीटनाशकों को वापस लेने की बाध्यता तय करने और सीलबंद उत्पादों में कमी मिलने पर विक्रेता को दोषी न मानने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो खरीफ सीजन से पहले देशभर में अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान किया जाएगा।