हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिली है। जोधपुर स्थित हाईकोर्ट में 16 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 669/2026 के मामले में विधायक को अंतरिम गिरफ्तारी संरक्षण दिया। कोर्ट ने उन्हें जांच में शामिल होने के निर्देश देते हुए कहा कि अगले आदेश तक इस एफआईआर के संबंध में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी। विधायक ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस स्तर पर एफआईआर रद्द करने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया। हनी बॉक्सर के फोन से धमकी देने का आरोप यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 351(3), 61(2) और 111(2)(बी) के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में बताया गया कि शिकायतकर्ता रिछपाल सिंह खर्रा ने आरोप लगाया है कि हनी बॉक्सर नामक व्यक्ति ने 3 जनवरी 2026 को फोन कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। शिकायत में कथित धमकी को विधायक गणेश राज बंसल से भी जोड़ा गया है। एफआईआर दर्ज कराने में देरी को बनाया आधार विधायक के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि कथित घटना 3 जनवरी की है, जबकि इस संबंध में एफआईआर 7 अक्टूबर 2026 को दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष ने शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी और विधायक की ओर से शिकायतकर्ता को सीधे धमकी देने के आरोप के अभाव को अपनी दलीलों का आधार बनाया। अधिवक्ताओं ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एफआईआर निरस्त करने की मांग की। पुरानी एफआईआर और आपसी प्रतिद्वंद्विता का दिया हवाला बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में विधायक के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने एफआईआर संख्या 624/2026 और 625/2026 का हवाला देते हुए बताया कि हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने 23 सितंबर 2026 को इन एफआईआर को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा, बचाव पक्ष ने एफआईआर संख्या 641/2026 से जुड़े मामले में भी विधायक को गिरफ्तारी से संरक्षण मिलने की बात अदालत के समक्ष रखी। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर वर्तमान एफआईआर को भी निरस्त करने की मांग की गई। सरकारी पक्ष और परिवादी ने किया विरोध सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने याचिका का विरोध किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि एफआईआर में गंभीर आरोप लगाए गए हैं और शिकायतकर्ता का बयान दर्ज होना अभी बाकी है। परिवादी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के ''निहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम महाराष्ट्र राज्य'' मामले का भी हवाला दिया। साथ ही समाचार पत्रों की कतरनें पेश कर विधायक के खिलाफ अन्य आरोपों का उल्लेख किया। ये सभी बातें सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा थीं। जांच में शामिल होने के निर्देश, एफआईआर पर फैसला बाकी दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विधायक को फिलहाल गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देते हुए जांच में शामिल होने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से अगले आदेश तक संबंधित एफआईआर में गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। हालांकि, एफआईआर निरस्त करने की याचिका पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी।