हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर बुधवार को बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों ने रेलवे बोर्ड की प्रस्तावित ऑनलाइन पास व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि अधिकांश पेंशनभोगी अधिक आयु वर्ग के हैं और डिजिटल तकनीक का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने मैन्युअल पास व्यवस्था को पहले की तरह जारी रखने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो वे ऑनलाइन पास का उपयोग नहीं करेंगे। रेलवे बोर्ड के फैसले का विरोध प्रदर्शनकारियों ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने 29 मई को आदेश जारी कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन पास व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस निर्णय का देशभर के रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सालों से वे मैन्युअल पास के माध्यम से बिना किसी तकनीकी परेशानी के यात्रा सुविधा का लाभ लेते आए हैं। बुजुर्ग कर्मचारियों के लिए तकनीक बनी चुनौती रेलवे से सेवानिवृत्त लोको पायलट हेमचंद ने कहा कि अधिकांश पेंशनभोगी अधिक आयु वर्ग के हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं हैं और जिनके पास स्मार्टफोन हैं, वे भी मोबाइल ऐप, ऑनलाइन लॉगिन, ओटीपी जैसी प्रक्रियाओं का आसानी से उपयोग नहीं कर पाते। ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए परेशानी का कारण बनेगी। पहले भी वापस लेना पड़ा था फैसला प्रदर्शनकारियों ने बताया कि रेलवे प्रशासन पहले भी ऑनलाइन पास व्यवस्था लागू करने का प्रयास कर चुका है। उस समय देशभर के रिटायर्ड कर्मचारियों के व्यापक विरोध के बाद रेलवे बोर्ड को मैन्युअल पास व्यवस्था जारी रखनी पड़ी थी। उनका कहना है कि अब फिर उसी व्यवस्था को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे हजारों पेंशनभोगी प्रभावित होंगे। मांग नहीं मानी तो ऑनलाइन पास का नहीं करेंगे उपयोग सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि उनकी आयु, तकनीकी सीमाओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए मैन्युअल पास व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे रेलवे द्वारा जारी ऑनलाइन पास का उपयोग नहीं करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर अपने खर्चे पर यात्रा करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि डिजिटलीकरण के साथ वरिष्ठ नागरिक कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों और सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।