राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वनपाल भर्ती परीक्षा 2025 में महिला अभ्यर्थियों के लिए सीने की माप के नियम पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने ज्योति शर्मा की ओर से दायर डी.बी. सिविल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव, वन विभाग के सचिव, कार्मिक विभाग के सचिव तथा राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित गौड़ और भवानी सिंह तंवर ने वनपाल भर्ती में सीने के माप के नियम को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वन विभाग में 785 पदों पर वनपाल भर्ती की परीक्षा हो चुकी है। शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए 1413 अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। बीकानेर संभाग में 259 पदों पर भर्ती होनी है, जिसमें से महिलाओं के लिए 80 पद आरक्षित हैं। संभाग में शॉर्टलिस्ट किए गए 159 अभ्यर्थियों में 66 महिला अभ्यर्थी हैं। क्यों उठ रहे हैं नियम पर सवाल? 1: संविधान के अधिकारों का हनन: याचिका में राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम, 2015 के नियम 19 (2) (ए) को चुनौती दी गई है। इसमें महिलाओं के सीने की माप और फुलाव के प्रावधान को मनमाना और अवैज्ञानिक बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 16 (अवसर की समानता) और 21 (जीवन और शारीरिक गरिमा का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करता है। 2: पहले भी गलत ठहराया जा चुका है यह नियम: याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पहले भी (रिट याचिका संख्या 6847/23, वंदना कंवर व अन्य बनाम राजस्थान राज्य, फैसला 10.8.2023) इस प्रकार के नियमों को महिलाओं की निजता और गरिमा के खिलाफ माना था। 3: अदालत के रुख के बावजूद दोबारा शामिल किया नियम: हाईकोर्ट के पुराने फैसले के बावजूद वन विभाग की वर्तमान भर्ती परीक्षा की शारीरिक दक्षता जांच में इस प्रावधान को दोबारा शामिल कर लिया गया। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक अपना रुख स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।