कमजोर मानसून से पहले ही फसल उत्पादन घटने और किसानों की आय प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में खरीफ फसलों की गिरदावरी में लापरवाही किसानों के लिए नई मुसीबत बन सकती है। उदयपुर जिले में खेतों में बोई गई फसल और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज फसल के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। कहीं मक्का की फसल के बजाय ग्वार-ज्वार दर्ज है, तो कहीं मक्का की फसल काटकर खेत में रखी होने के बावजूद जमीन को पड़त यानी खाली बता दिया गया। ऐसे रिकॉर्ड के आधार पर किसानों को फसल बीमा और सरकारी खरीद का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। भास्कर ने कुराबड़ और गिर्वा तहसील के दो गांवों में खसरा नंबर के आधार पर गिरदावरी रिकॉर्ड का मौके से मिलान किया। पड़ताल में चार खसरों पर दर्ज फसल और खेत की वास्तविक स्थिति में अंतर मिला। सवाल यह है कि जब गिरदावरी में हर खेत का मौके पर सर्वे करना जरूरी है, तो गलत रिपोर्ट कैसे दर्ज हुई और सत्यापन के दौरान ये गड़बड़ियां पकड़ में क्यों नहीं आईं? कलेक्टर बोले- गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई होगी जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने कहा कि गिरदावरी में रही खामियों को सुधारा जाएगा। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और त्रुटियों को भी ठीक किया जाएगा। केस1: कुराबड़: मौके पर कोई नहीं आया, सोयाबीन की जगह ज्वार दर्ज की खसरा 1384, रोडदा : खेत में मक्का काटकर रखी थी, लेकिन 0.12182 हेक्टेयर भूमि पर ग्वार की फसल दर्ज थी। किसान अनोप सिंह ने बताया कि मक्के की फसल बोई थी। उनके अनुसार, मौके पर सर्वे के लिए कोई पटवारी या गिरदावर नहीं आया। खसरा 1387, रोडदा: रिकॉर्ड में 0.05000 हेक्टेयर भूमि पर ज्वार दर्ज थी, जबकि खेत में सोयाबीन की फसल खड़ी मिली। किसान माधोसिंह ने बताया कि इस बार उन्होंने सोयाबीन और मक्का बोई थी। जंगली सूअरों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया। केस2: गिर्वा: खेत में ही काट कर रखी थी मक्का, रिकॉर्ड में खेत पड़त खसरा 4083, देबारी: 0.18000 हेक्टेयर भूमि को गिरदावरी रिपोर्ट में पड़त दर्ज किया गया, जबकि खेत में मक्के की फसल काटकर रखी हुई थी। खसरा 5478/4082, देबारी: 0.17000 हेक्टे. भूमि भी पड़त दर्ज थी, जबकि यहां मक्का बोई गई थी और काटी हुई फसल खेत में रखी हुई थी। किसान कैलाश माली ने बताया कि वे दोनों खेतों में करीब छह साल से मक्का और गेहूं की फसल की खेती कर रहे हैं। इसके बावजूद पटवारी की गिरदावरी में जमीन को पड़त दर्ज कर दिया गया। अफसरों ने आंखें मूंदकर किया सत्यापन देरी से शुरू हुआ सर्वे : खरीफ गिरदावरी 1 सितंबर से 15 अक्टूबर तक चली। सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू होती है। हड़ताल के कारण इस बार करीब एक महीने की देरी हुई। मौके पर जाकर करना था सर्वे : नियम के अनुसार, पटवारी को मौके पर जाकर हर खेत का सर्वे करना होता है। जरूरत पड़ने पर पंचायत के निजी व्यक्ति से भी सर्वे कराया जा सकता है। तीन स्तरों पर सत्यापन : रिपोर्ट तैयार होने के बाद गिरदावर अपनी आईडी से सत्यापन करता है। फिर तहसीलदार सत्यापन कर रिपोर्ट की आईडी लॉक करता है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में अंतर मिला। खरीफ: 1.83 लाख हेक्टे. में बुवाई, 98.54% लक्ष्य पूरा इस साल जिले में खरीफ में बुवाई का लक्ष्य 1 लाख 86 हजार 120 हेक्टेयर रखा गया था। जिसमें 1 लाख 83 हजार 400 हेक्टेयर भूमि पर बुवाई की गई है। यानी की 98.54 प्रतिशत एरिया में बुवाई कर दी गई। जिले में खरीफ का लक्ष्य सर्वाधिक राशि मूंगफली की फसल बीमा योजना के अनुसार जिले में इन फसलों को प्रति हेक्टेयर इतनी बीमा राशि दी जाएगी।