इस साल अधिक मास होने के कारण दो ज्येष्ठ माह हैं। यानी 60 दिन तक तपिश रहेगी। अधिक ज्येष्ठ 17 मई और निज ज्येष्ठ माह 16 जून से प्रारंभ होगा, जो 14 जुलाई तक चलेगा। यानी इस साल गर्मी ज्यादा और अधिक समय तक पड़ने की संभावना है। इसलिए मंदिरों में भी ठाकुरजी के लिए गर्मी से राहत दिलाने के लिए भोग, राग और पोशाक में बदलाव किया गया है। पंखे-कूलर लगाए गए हैं। पुराने मंदिरों में छत के बीजना झुलाए जा रहे हैं। पानी के लिए मिट्टी के कुंजे रखे गए हैं। ठंडक पहुंचाने वाले इत्र का छिड़काव किया जा रहा है। आरडी गर्ल्स कॉलेज स्थित मदनमोहन जी मंदिर में ठाकुर जी के लिए खस की टटियां लगवाई गई हैं। मदनमोहन जी मंदिर के पुजारी दिगंबर पंडा ने बताया कि इस बार अधिकमास के कारण ज्येष्ठ की तपन दो महीने रहेगी, इसलिए ठाकुरजी को ठंडक पहुंचाने वाली यह विशेष सेवा भी पूरे 60 दिनों तक चलेगी। खस चटाई पारंपरिक प्राकृतिक कूलिंग साधन प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि खस की टटिया गर्मियों में इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक प्राकृतिक कूलिंग साधन है। खस की जड़ों से बनी टटिया पर पानी डाला जाता है। हवा जब इससे होकर गुजरती है तो ठंडी हो जाती है, जिससे कमरे का तापमान कम महसूस होता है। खस की जड़ों में प्राकृतिक खुशबू होती है, जो कमरे को ताजगी भरा बनाती है। ठाकुरजी के श्रीअंग पर केसर, कपूर और गुलाब जल मिश्रित चंदन का लेप किया जा रहा है। खस, गुलाब और मोगरे के इत्र, शीतल मधुर भोग और ऋतु फलों का रस अर्पित किया जा रहा है। ठाकुर जी को सिल्क और जड़ाऊ पोशाक के बजाय सूती/मलमल से निर्मित पोशाक धारण कराए जा रहे हैं। छाछ, दही, राबड़ी, घाट का दलिया, ठंडाई, लस्सी, फुलका, दाल, रबड़ी, स्पंज रसगुल्ला, खरबूज, तरबूज, आम, फालसे आदि का भोग लगाया जा रहा है। दो ज्येष्ठ माह पुरुषोत्तम मास के कारण ज्योतिषाचार्य रामभरोसी भारद्वाज ने बताया कि इस साल हिंदू पंचांग में 12 की जगह 13 महीने माने जाएंगे और ज्येष्ठ माह लगभग 60 दिनों तक रहेगा। पहला यानी अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा, जबकि दूसरा ज्येष्ठ मास 16 जून से 14 जुलाई तक रहेगा।