विवेक उपाध्याय | प्रतापगढ़ सड़क सुरक्षा के तमाम दावों के बीच जिले में नशे में वाहन चलाना जानलेवा साबित हो रहा है। पिछले 15 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 487 वाहन चालक शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए हैं। इनमें साल 2025 में 392 और साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 95 मामले सामने आए हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि इसी अवधि में जिले में हुए कुल 328 सड़क हादसों में 186 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 358 लोग घायल हुए हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ धारा 185 एमवी एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए मामले सीधे कोर्ट भेजे जा रहे हैं। जिले में ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर प्रतिदिन नाकाबंदी और चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं, फिर भी हादसों की रफ्तार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यातायात व्यवस्था को सुधारने और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस विभाग द्वारा आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में जिला पुलिस के पास कुल 33 ब्रेथ एनालाइजर मशीनें उपलब्ध हैं, जिनसे संदिग्ध वाहन चालकों की जांच की जाती है। महानिरीक्षक रेंज उदयपुर और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (यातायात) के आदेशानुसार जिले में प्रतिदिन नाकाबंदी और प्रतिमाह विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस ने जिले के 17 थानों के अंतर्गत आने वाले दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की सूची तैयार की है। इसमें प्रतापगढ़ थाने के मकनपुरा से बगवास, सुहागपुरा का कचोटिया और धरियावद का गांधीनगर जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां सबसे ज्यादा हादसे होने की संभावना बनी रहती है। पुलिस ने कचोटिया- थाना सुहागपुरा, आशीर्वाद होटल क्षेत्र- थाना प्रतापगढ़, मचलाना घाटी- थाना हथुनिया, अंबावली तिराहा- थाना धोलापानी, बारावरदा चौराहा- थाना धमोतर को हादसे वाली जगह में शामिल कर रखा है। मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) की धारा 185 में यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर वाहन चलाता है और उसके 100 मिलीलीटर रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 मिलीग्राम से अधिक पाई जाती है, तो उसे जेल या भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। पुलिस वाहन को जब्त कर चालान कोर्ट भेजती है। कोर्ट के जरिए तय होता है जुर्माना, पुलिस नहीं वसूलती मौके पर राशि... जिले में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में पुलिस मौके पर कोई जुर्माना राशि वसूल नहीं करती है। नियमानुसार, शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध धारा 185 एमवी एक्ट के तहत इस्तगासा (शिकायत) तैयार कर माननीय न्यायालय में पेश किया जाता है। इसके बाद न्यायालय के आदेशानुसार ही जुर्माने की राशि या सजा का निस्तारण किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 392 चालानी कार्रवाई की गई थी, वहीं मार्च 2026 तक यह संख्या 95 रही है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले 50 वाहन चालकों के लाइसेंस भी पिछले 15 महीनों में निलंबित कराए गए हैं।