ब्यावर| दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने के एक मामले की जांच के संबंध में जयपुर से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीम मंगलवार को ब्यावर पहुंची। राजकीय अमृतकौर अस्पताल (एकेएच) में रिकॉर्ड खंगालते हुए वर्ष 2018 में जारी प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू किया। टीम ने अस्पताल प्रबंधन से विस्तृत जानकारी लेते हुए संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की। एसओजी टीम में पुलिस उप अधीक्षक राजेंद्र चारण, एसआई रफीक मेवाड़ा (अजमेर) सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। टीम सीधे एकेएच परिसर स्थित पीएमओ कक्ष पहुंची, जहां अधिकारियों ने रिकॉर्ड का निरीक्षण किया और संबंधित कार्मिकों से पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, जांच का केंद्र बिंदु कंचन कंवर को जारी दिव्यांग प्रमाण पत्र रहा। टीम यह जानने में जुटी है कि यह प्रमाण पत्र कब जारी हुआ, किस विशेषज्ञ चिकित्सक ने जांच की और किन आधारों पर इसे जारी किया गया। पीएमओ के निर्देश पर एसओजी ने अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं नोडल प्रभारी डॉ. अरविंद अग्रवाल से 26 अप्रैल 2018 को जारी प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी मांगी। डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उस समय वे ब्यावर में पदस्थापित नहीं थे। हालांकि, नोडल प्रभारी होने के नाते उन्होंने तत्कालीन नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मीना द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि टीम को सौंपी। साथ ही प्रमाण पत्र से जुड़े अन्य आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए। ताकि जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके। मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन सतर्क नजर आया। पीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह चौहान ने एसओजी टीम के ब्यावर आने की पुष्टि तो की, लेकिन जांच से संबंधित पत्रावली को गोपनीय बताते हुए मीडिया को विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञ डॉ. अग्रवाल के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना अनिवार्य है। ऐसे में जांच टीम यह भी परख रही है कि संबंधित प्रमाण पत्र नियमानुसार जारी हुआ या नहीं। फिलहाल एसओजी की ओर से दस्तावेजों के सत्यापन और तथ्यों के मिलान की प्रक्रिया जारी है।