मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) के स्वर्ण जयंती अतिथि गृह से 12 लाख रुपए से ज्यादा का सामान गायब (चोरी) होने के मामले में प्रशासनिक लापरवाही और आरोपियों को बचाने की फितरत उजागर हुई है। दो साल पहले ही जांच कमेटी यह मान चुकी है कि गेस्ट हाउस से एलईडी टीवी, फ्रिज, एसी, कंप्यूटर, प्रिंटर, डाइनिंग व स्टडी टेबल जैसे घरेलू सामान चोरी या गायब हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो पुलिस में केस दर्ज हुआ और न ही किसी पर आरोप तय किए गए। 24 घंटे 15 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और 18 कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद कड़ी सुरक्षा के बीच हुए इस बड़े घोटाले पर जांच कमेटी की सुस्त कार्यशैली खुद सवालों के घेरे में है। हालांकि, अब कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा के कार्यकाल में इस मामले की स्पेशल ऑडिट कराई जा रही है। 2014 में शुरू हुए इस गेस्ट हाउस में हुई खरीदारी के बिल व लेजर रिकॉर्ड में मौजूद होने के बावजूद सामान का गायब होना अंदरूनी साठगांठ का सीधा मामला है। ऑडिट शुरू होते ही विश्वविद्यालय के अन्य विभागों या स्थानों से भी सामान गायब होने की नई जानकारियां सामने आने लगी हैं, जिससे विवि प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ऑडिट में सुविवि के स्टेट ऑफिस से प्राप्त होने वाले दस्तावेज ऐसे ही अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी परतें खोलेंगे। 3 पूर्व वीसी, 7 वित्त नियंत्रक और 3 इंचार्ज कर चुके इनकार जांच कमेटी ने माना है कि सामान चोरी हुआ, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार कौन है, इसका उल्लेख नहीं किया। कमेटी ने खुद को इस विवाद से बचाने के लिए ऑडिट कराने की सलाह दे दी, जिस पर अब काम शुरू हुआ है। गेस्ट हाउस के लिए यह सामान पूर्व वीसी प्रो. आईवी त्रिवेदी, प्रो. जेपी शर्मा व प्रो. अमेरिका सिंह के कार्यकाल में खरीदा गया। इस दौरान कुमुदनी, एसएल चौधरी, जगमोहन सिंह, डीएन पुरोहित, गिरीश कच्छारा, सुरेश कुमार व भूपेश वित्त नियंत्रक रहे। बिल वित्त नियंत्रक कार्यालय व स्टोर लेजर में दर्ज हैं। 2014 से अब तक तीन इंचार्ज प्रो. अशोक सिंह, डॉ. राकेश्वर पुरोहित व प्रो. हनुमान प्रसाद रहे, पर तीनों ही जांच कमेटी के समक्ष सामान चोरी से इनकार कर चुके हैं। कागजी प्रक्रियाओं में उलझी रिपोर्ट, ऑडिट से वसूली की उम्मीद 28 मई 2024 को हुई समिति बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 अप्रैल 2014 से अब तक के बैंक स्टेटमेंट मंगवाए जाएं, भू-संपत्ति कार्यालय से बिल व स्टॉक रजिस्टर लिए जाएं और बाहरी लेखा विशेषज्ञ शामिल कर उप-समिति बनाई जाए। साथ ही सभी पूर्व इंचार्ज को व्यक्तिगत पक्ष रखने के लिए बुलाने का निर्णय लिया गया। बैठक में कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, प्रो. एसएस भाणावत, दिनेश हरकावत, प्रो. हनुमान प्रसाद व संयोजक प्रो. नीरज शर्मा मौजूद रहे। कमेटी कन्वीनर प्रो. नीरज शर्मा व तत्कालीन रजिस्ट्रार श्वेता फगेड़िया के अनुसार जांच रिपोर्ट दो साल पूर्व ही विवि प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर दी गई थी। गायब हुआ सामान पूरी तरह घरेलू उपयोग का है, जिससे प्रबल आशंका है कि कार्यरत स्टाफ या कर्मचारी ही इसे अपने-अपने या किसी पदाधिकारी के घर ले गए होंगे। अब कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा द्वारा ऑडिट से दोषियों के नाम उजागर कराने और गायब सामान की वसूली की उम्मीद जागी है।