जयपुर-अजमेर हाईवे पर लगातार 2 दिन 2 बड़े हादसे हुए। पांच लोगों को बेकाबू डंपर-ट्रकों ने कुचल दिया था। जिला कलेक्टर ने एक टीम बनाकर हादसे के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। उससे पहले भास्कर टीम ने सबसे ज्यादा हादसे वाले स्पॉट पर पहुंचकर पड़ताल की। 200 फीट बाइपास से करीब 10 किलोमीटर के बीच 40 से ज्यादा अवैध स्टॉपेज मिले। सवारियां भरने की होड़ में अवैध तरीके से बसें-टैक्सियां यहां रुकती हैं। लोग जान जोखिम में डालकर रेलिंग कूदकर हाईवे क्रॉस कर रहे थे। ट्रेलर और ट्रक ओवर स्पीड में दौड़ रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है 7 जुलाई को जहां ट्रेलर ने फुटपाथ पर खड़े एक परिवार के 5 लोगों को कुचला था, वहां यू-टर्न को अभी तक बंद नहीं किया गया है। न ही टूटी रेलिंग को ठीक किया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट..... नंबर-1 : पांच मौत वाला 'यू-टर्न' अब भी चालू हीरापुरा पुलिया के पास 7 और 8 जुलाई को दो अलग-अलग हादसे हुए। 7 जुलाई को फुटपाथ पर बस का इंतजार कर रहे एक ही परिवार के 5 लोगों को एक ट्रेलर ने कुचला दिया था। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अगले ही दिन बाइक सवार दो लोगों को कुचला, जिसमें एक की मौत हो गई। पांच लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। 7 दिन बाद जब भास्कर टीम वहां पहुंची तो फिर से वैसे ही हालात थे। पुलिया से उतरने वाले वाहन सर्विस लेन से रॉन्ग साइड में यू-टर्न लेते नजर आए। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ ने भी अवैध बस स्टैंड पर खड़ी बसों के खिलाफ कुछ दिन केवल औपचारिक चालान कर कार्रवाई पूरी मान ली। एनएचएआई ने दुर्घटना में क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत कर एक साइन बोर्ड और ब्लिंकर लाइट लगा दी है। लेकिन इससे तुरंत पहले जहां पुलिया खत्म होती है, वहां यू-टर्न बंद नहीं किया गया। पुलिया से उतरने वाले हिस्से पर स्पीड कंट्रोल के लिए रंबल स्ट्रिप्स (डंबल ब्रेकर) लगाने जैसी जरूरी कार्रवाई अब तक नहीं की गई। सर्विस लेन से यू-टर्न लेने वाले वाहन लगातार दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं। इससे महज एक किलोमीटर आगे चलते ही कमला नेहरू नगर पुलिया आती है। यहां पुलिया के नीचे ट्रैफिक पुलिस ने वाहन नहीं निकालने का साइन बोर्ड तो लगा दिया। लेकिन पुलिस की मौजूदगी में ही रॉन्ग साइड से वाहन निकल रहे हैं। नंबर-2 : रिंग रोड से पहले टूटी रेलिंग, न मरम्मत हुई, न लगा साइन बोर्ड एनएचएआई ने अजमेर से जयपुर आने वाले भारी वाहनों को रिंग रोड पर डायवर्ट करने के लिए लूप (लीफ) शुरू किया था। मुख्य सड़क से कटने वाले इस हिस्से पर लगाई गई रेलिंग करीब महीनेभर पहले एक भारी वाहन की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक महीने बाद भी रेलिंग की मरम्मत नहीं हुई और न ही यहां रिंग रोड की दिशा बताने वाला कोई साइन बोर्ड लगाया गया है। क्षतिग्रस्त रेलिंग भविष्य में बड़े हादसों की वजह बन सकती है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा हाईवे पर कई साइन बोर्ड धुंधले या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे खासकर रात में वाहन चालकों को खासी परेशानी हो सकती है। नंबर-3 : सर्विस लेन पर साइन बोर्ड गायब, कई विज्ञापनों से ढके हीरापुरा चौराहे से लेकर बगरू तक करीब 20 किलोमीटर आबादी क्षेत्र इस हाईवे से लगता है। यहां सर्विस लेन पर पर्याप्त साइन बोर्ड नहीं हैं। वाहन चालकों को सर्विस लेन की एंट्री और एग्जिट समझने में परेशानी होती है। जहां साइन बोर्ड लगे हैं, वहां भी कई जगह स्थानीय लोगों ने अपने प्रतिष्ठानों के विज्ञापन लगाकर उन्हें ढक दिया है। नतीजतन तेज रफ्तार वाहन चालकों को समय पर दिशा की जानकारी नहीं मिलती और वे आगे जाकर सड़क पर ही वाहन रोक देते हैं। एनएचएआई और ट्रैफिक पुलिस की नियमित मॉनिटरिंग के अभाव में यह अव्यवस्था बनी हुई है। नंबर-4 : हाईवे पर बस, ऑटो, जीप और ट्रकों के 40 से ज्यादा अवैध स्टॉपेज जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर हीरापुरा से बगरू और बगरू से हीरापुरा के बीच करीब 40 अवैध स्टॉपेज बने हुए हैं। आसपास की कॉलोनियों से सवारियां उठाने की होड़ लगी रहती है। पड़ताल के दौरान कई वाहन चालक इन अवैध स्टॉपेज पर रोकर सवारियां उतारते-चढ़ाते मिले। कुछ जगहों पर चेतावनी के साइन बोर्ड लगे हैं। लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में हालात जस के तस हैं। हाईवे के दोनों तरफ लोहे की मजबूत रेलिंग लगी है। लेकिन कई जगह लोगों ने रेलिंग तोड़कर अपनी कॉलोनियों के लिए रास्ते बना लिए हैं। प्रशासन और एनएचएआई ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। नंबर-5 : 10 किलोमीटर तक न फुटओवर ब्रिज, न अंडरपास जयपुर-अजमेर हाईवे पर हीरापुरा से बगरू के बीच करीब 10 किलोमीटर तक न कोई फुटओवर ब्रिज है और न ही पैदल यात्रियों के लिए अंडरपास। केवल कुछ जगह पुलिया हैं, जिनके बीच डिस्टेंस काफी ज्यादा है। हाईवे के दोनों ओर घनी आबादी होने के कारण लोग जान जोखिम में डालते हुए सीधे हाईवे पार करते हैं। 60 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते वाहनों के बीच अचानक पैदल यात्री आने से लगातार हादसे हो रहे हैं। कई लोग सड़क पार करते समय जान गंवा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग न रेलिंग दुरुस्त करा रहे हैं और न ही पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित पार-पथ बना रहे हैं। एक स्थानीय निवासी विनोद ने बताया कि कुछ दिन पहले सड़क पार करते समय एक व्यक्ति तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ गया था। इसके बावजूद हालात में कोई बदलाव नहीं आया। नंबर-6 : लेन सिस्टम का पालन नहीं पुलिस मुख्यालय के निर्देश हैं कि भारी वाहन निर्धारित लेन में चलें, लेकिन हीरापुरा से बगरू तक कई ट्रक और अन्य भारी वाहन लेन सिस्टम का पालन करते नहीं मिले। गलत लेन में चलने के कारण छोटे वाहनों को बार-बार जिगजैग तरीके से ओवरटेक करना पड़ता है, जो दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकता है। नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने से हाईवे पर लेन सिस्टम केवल कागजों तक सीमित नजर आता है। हाईवे का दौरा कर चुके एक्सपर्ट ने मानी कई खामियां PWD के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्ट सीताराम शर्मा ने बताया कि उन्होंने खुद इस हाईवे पर कई खामियों को पॉइंट आउट किया है। नियमानुसार नेशनल हाईवे पर जहां सर्विस रोड बनी हुई है तो उस पॉइंट पर साइन बोर्ड लगे होने चाहिए। लेकिन जयपुर-अजमेर हाईवे पर अधिकांश जगह पर साइन बोर्ड नहीं हैं। जहां पर साइन बोर्ड लगे हैं, वहां पर लोगों ने अपने विज्ञापन लगा रखे हैं। इससे वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता कि सर्विस रोड कहां से शुरू हो रही है। पैदल चलने वालों के लिए इस हाईवे पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। देखा गया है कि लोग चलते वाहनों के बीच रोड क्रॉस करके निकल रहे हैं। इससे वह खुद के साथ-साथ दूसरे लोगों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। सीताराम शर्मा ने बताया एनएचएआई को चाहिए कि जहां फुट ओवर ब्रिज की जरूरत है, वहां बनाया जाए। हाईवे पर टैक्सी, बसें और अन्य निजी वाहन बीच में रोकर ही सवारियां उतार रहे हैं, इस पर प्रभावी तरीके से रोक लगे। ऐसे पॉइंट्स को चिन्हित कर वहां नो-पार्किंग, नो-स्टॉपेज के बोर्ड लगाने चाहिए। फिर भी कोई वाहन रोकता है तो कार्रवाई करनी चाहिए। जयपुर पुलिस कमिश्नर बोले- खामियों को लेकर NHAI को पत्र लिखा गया है जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल कहते हैं- हीरापुरा चौराहे पर हुई दुर्घटना के बाद ट्रैफिक पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया था। दुर्घटना की परिस्थितियों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी योगेश गोयल ने एनएचएआई (NHAI) को पत्र लिखकर वहां मौजूद कई तकनीकी खामियों की ओर ध्यान दिलाया है। जयपुर ट्रैफिक पुलिस अपने स्तर पर भी सुधार को लेकर प्रयास कर रही है। हाईवे पर संचालित अवैध बस स्टॉपेज बंद कराए जा रहे हैं। पुलिया के नीचे बना यू-टर्न यातायात की दृष्टि से पूरी तरह अनुचित है। इसलिए उसे भी बंद करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा करीब 100 मीटर लंबा खुला कट (लीफ) भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, जिसे कम कर लगभग आधा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ------- यह खबर भी पढ़िए… जयपुर में परिवार पर चढ़ा ट्रेलर, 4 की मौत:बच्चों के शव टुकड़ों में नाले में गिरे, मां के पैर टूटे; ट्रेलर के 5 चालान पेंडिंग जयपुर में तेज रफ्तार ट्रेलर ने फुटपाथ पर बैठे एक परिवार के 5 लोगों को कुचल दिया। हादसे में तीन बच्चों और पिता की मौत हो गई। मां के दोनों पैर टूट गए। हादसा इतना भीषण था कि बच्चों के शवों के चिथड़े उड़ गए। एक बच्चे के शव के दो टुकड़े हो गए। सभी लोग नाले में गिर गए। पढ़ें पूरी खबर